असम में बाढ़ से तबाही, संकट में बिहार

राज्य के राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री भूमिधर बर्मन ने शुक्रवार को बताया, "पिछले दो दिनों में चार जिलों लखीमपुर, धीमाजी, जोरहाट और नागांव के तकरीबन 350 गांवों में बाढ़ की वजह से लगभग 200,000 लोग बेघर हो गए हैं।"
अधिकतर विस्थापितों को अस्थायी शिविरों में शरण दी गई है। बर्मन ने कहा, "हम बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को खाद्य और चिकित्सा सहायता मुहैया करा रहे हैं।" असम के खाद्य नियंत्रण मंत्री पृथ्वी माझी ने कहा, "स्थिति गंभीर है। हम लोगों की तकलीफें कम की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।"
उधर, केंद्रीय जल आयोग की ओर से शुक्रवार को कहा गया कि असम की मुख्य नदी ब्रह्मपुत्र और इसकी सहयोगी नदियां कम से कम आठ जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
बिहार की प्रमुख नदियां उफान पर
उत्तर बिहार की प्रमुख नदियों खासकर कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक और बागमती नदियां अपने जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश की वजह से उफान पर हैं जिनसे बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है।
अधिकारियों ने शु़क्रवार को बताया कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले दो दिन से हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से नदियों के जलस्तर में खतरनाक बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय जल आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार गया है। वहीं गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।
खतरे को देखते हुए सरकार ने बाढ़ प्रभावित मधेपुरा, सुपोल, सहरसा, अररिया पूर्णिया, दरभंगा, समस्तीपुर और सीतामढ़ी जिलों के अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को संवदेनशील तटबंधों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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