रेल बजट : युवाओं को मिला 'युवा', कामगारों को 'इज्जत' (राउंडअप)
उन्होंने यात्री व माल भाड़े में बढ़ोतरी किए बिना प्रमुख स्टेशनों के बीच सीधी रेलगाड़ी चलाने, इंटरसिटी यात्रा के लिए डबल डेकर वातानुकूलित गाड़ियां चलाने, पांच हजार डाक घरों में टिकट की बिक्री करने और दो सौ स्टेशनों पर स्वचालित टिकट बिक्री मशीन लगाने की घोषणा की।
यद्यपि, राजनीतिक दलों ने इस पर अपनी मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे शानदार बजट बताया है वहीं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कहा कि बनर्जी ने कई घोषणाएं नासमझी में की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे वास्तविकता से दूर जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने इसे महत्वकांक्षी करार दिया।
लोकसभा में करीब 65 मिनट के अपने भाषणा के दौरान बनर्जी ने कहा, "पूरे देश के लोगों को रेलवे से काफी उम्मीदें हैं।" उन्होंने कहा कि रेलवे को मजबूत, जवाबदेह और गतिशील संगठन बनाने लिए पिछले पांच साल के कामकाज के बारे में श्वेत पत्र जारी किया जाएगा।
उन्होंने 40,745 करोड़ रुपये के योजनागत खर्च का प्रस्ताव रखते हुए कहा, "अब समय आ गया है कि हमारे आर्थिक और सामाजिक चिंतक आर्थिक व्यवहार्यता की पुरानी सोच को बदलें और उसकी जगह सामाजिक प्रतिबद्धता को दें। "
रेल मंत्री ने नोबल पुरस्कार विजेता साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर की पक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, "रेलवे एक ऐसा संगठन है जिसके पास व्यावसायिक एवं सामाजिक दोनों जिम्मेदारियां है।"
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता कुछ मूलभूत लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं जैसे कम कीमत पर स्वादिष्ट भोजन, स्टेशन और रेलगाड़ियों में साफ-सुथरे शौचालय, पेय जल की उपलब्धता और यात्रियों के लिए आरामदायक प्रतीक्षा कक्ष उपलब्ध करवाना।
उन्होंने कुछ स्टेशनों के बीच डबल डेकर रेल सेवा शुरू करने के अलावा 57 नई रेलगाड़ियां चलाने, 27 रेलगाड़ियों के मार्ग में विस्तार और 13 गाड़ियों के फेरे में बढ़ोतरी की घोषणा की।
बजट में 200 जगहों पर स्वचालित टिकट मशीन लगाने के अलावा 800 नई जगहों पर आरक्षण की सुविधा मुहैया कराने की बात कही गई है।
तत्काल सेवा योजना के तहत अब दो दिन पहले टिकट लेने होंगे और इसके तहत शुल्क को 150 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है।
बनर्जी ने अपने बजट में 1500 रुपये से कम मासिक आय वाले असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए 'इज्जत' नामक नई योजना की शुरुआत की, जिसके तहत यात्रियों को 25 रुपये में 100 किलोमीटर की दूरी के लिए मासिक पास जारी किया जाएगा।
रेल मंत्री ने मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए भी अपने पिटारे खोले हैं। अब उन्हें किराये में 30 की जगह 50 फीसदी की छूट मिलेगी। इतना ही नहीं साल में एक बार उनके पति या पत्नी को भी यह सुविधा मिलेगी।
उन्होंने निजी-सार्वजनिक भागीदारी के आधार पर 50 स्टेशनों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने और 375 पर आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने की घोषणा की। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण 50 स्टेशनों पर शॉपिंग, मल्टीप्लेक्स, फूड स्टॉल, सस्ते होटल आदि बनाने की घोषणा की।
ममता ने औसत कीमत पर 'जनता खाना' उपलब्ध कराने की बात कही, जिसमें राष्ट्रीय व क्षेत्रीय व्यंजन शामिल होंगे।
रेलवे की वित्तीय स्थिति के बारे में बनर्जी ने कहा, "समीक्षा के बाद यह स्पष्ट है कि अंतरिम बजट में अवास्तविक लक्ष्य तय किए गए थे जिसे हासिल करना संभव नहीं है और इसमें संशोधन की जरूरत है।"
उन्होंने अनुमान से अधिक संचालन खर्च की संभावना जताते हुए कहा कि यह 92.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अंतरिम बजट में इसके 89.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।
बनर्जी ने कहा कि आर्थिक संकट के कारण 85 करोड़ टन माल ढुलाई के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका लेकिन पांच फीसदी का विकास प्राप्त करने में रेलवे सफल रहा। इस बार माल ढुलाई का लक्ष्य 88.2 करोड़ टन है।
इस बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "रेल मंत्री ने उपलब्ध समय में शानदार काम किया है। उन्होंने एक ऐसा बजट पेश किया जिसमें लोगों पर किसी तरह का बोझ नहीं डाला गया है।"
वाम दलों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बजट के कुछ हिस्सों की तारीफ की है तो भाकपा ने इसकी तीखी आलोचना की है।
माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने कहा, "निजीकरण के रास्ते से रेलवे अभी भी अलग नहीं हुई है लेकिन फिर भी कुछ अच्छे कदम उठाए गए हैं। असंगठित क्षेत्र के कामगारों व महिलाओं के लिए रियायतें व सुविधाएं देने का फैसला स्वागत योग्य है।"
हालांकि माकपा नेता वासुदेव आचार्य ने रेल बजट की आलोचना करते हुए इसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2011 का घोषणापत्र करार दिया। उन्होंने कहा, "बजट का सार देखने से ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी ने 2011 में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव का घोषणापत्र जारी किया है।"
भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा, "रेल बजट आवश्यकता से अधिक महत्वाकांक्षी और जमीनी हकीकतों से परे है।"
मुख्य विपक्षी भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "बजट में जितनी घोषणाएं की गई हैं उन्हें पूरा कर पाना असंभव है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार वादे तो बहुत करती है लेकिन उसे पूरा करने के मामले में वह पीछे रह जाती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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