होवित्जर तोपों की खरीद के लिए सेना नई निविदा जारी नहीं करेगी
वर्ष 1986 में हुए विवादास्पद बोफोर्स तोप सौदे के बाद से देश में एक भी तोप की खरीदारी नहीं की गई है। इस वर्ष 10 महीने के मूल्यांकन के बाद सिंगापुर टेक्नोलाजीज द्वारा निर्मित अति हल्की होवित्जर तोपों को मैदानी परीक्षण के लिए चुना गया था। लेकिन रक्षा मंत्रालय द्वारा इस कंपनी को काली सूची में डाल दिए जाने के बाद सेना के आधुनिकीकरण की यह योजना खटाई में पड़ गई। काली सूची में डाली गई कंपनियों के साथ हुए सभी सौदे रोक दिए गए हैं।
मैदानी परीक्षण के लिए सिंगापुर की इस कंपनी द्वारा तोपों की पहली खेप की आपूर्ति 29 मई को की गई थी और उसका पांच जून तक परीक्षण किया जाना था, तब तक कंपनियों की काली सूची जारी हो गई।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "रक्षा मंत्रालय की तकनीकी मूल्यांकन समिति द्वारा 10 महीनों तक किए गए मूल्यांकन के बाद सिंगापुर टेक्नोलॉजीज काइनेटिक्स द्वारा निर्मित अति हल्की पेगैसस होवित्जर तोपों को मैदानी परीक्षण के लिए चुना गया है। ऐसे में सेना अति हल्की होवित्जर तोपों के लिए नया प्रस्ताव नहीं जारी करेगी।"
अधिकारी ने कहा, "हम मामले में जांच परिणाम का इंतजार करेंगे।"
सेना को चीन के खतरे से निपटने के लिए अति हल्की होवित्जर तोपों की जरूरत है, क्योंकि भारी तोपों को हिमालय की पहाड़ियों पर नहीं ले जाया जा सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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