उड़ीसा में महिला स्वास्थ्य में सुधार के दावे खोखले

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। सरकार का दावा करती है कि उसके प्रमुख कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण स्वास्थ्य में व्यापक बदलाव हो रहा है। लेकिन समाजसेवी एजेंसियों के एक समूह द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि उड़ीसा में स्वास्थ्य के देखभाल की व्यवस्था बद से बदतर है और महिलाएं प्रसव के दौरान अस्पतालों में दम तोड़ रही हैं।

व्हाइट रिबन एलायंस, इंडिया के सह अध्यक्ष नबीन कुमार पति ने कहा है, "पहले प्रसव के दौरान तमाम महिलाएं अपने घरों में दम तोड़ देती थीं, अब वे स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उसी तरह की समस्याओं का सामना कर रही हैं।"

संस्था द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि सुरक्षित मातृत्व नीतियों और कार्यक्रमों को लागू किए जाने में ही दिक्कतें मौजूद हैं।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष में खुलासा किया गया है कि 55 प्रतिशत सहायक नर्स मिडवाइफों (एएनएम) के पास तौलने के उपकरण ही नहीं हैं और 55 प्रतिशत के पास रक्तचाप मापने के उपकरण नहीं हैं। जबकि देश के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल में एएनएम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

संस्था की राष्ट्रीय समन्वयक अपराजिता गोगोई ने संवाददाताओं को बताया, "इन स्वास्थ्य कर्मियों में से मात्र 8.1 प्रतिशत के पास ही आला उपलब्ध है। इससे स्वास्थ्य उपकरणों और दवाओं की आपूर्ति की खामियां उजागर होती हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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