जनजातीय नेताओं ने लालगढ़ में होने का दावा किया
पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण समिति (पीसीएपीए) के प्रमुख महतो ने कहा, "मैं अभी भी लालगढ़ में हूं। इस इलाके को छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि मैंने कोई अपराध नहीं किया है।"
पीसीएपीए के एक अन्य नेता के साथ वह एक निजी बांग्ला टेलीविजन चैनल से बात कर रहे थे।
महतो ने स्टार आनंद के साथ फोन पर एक साक्षात्कार में कहा, "लालगढ़ से भागने का कोई सवाल ही नहीं उठता। मैं अपने लोगों के साथ हूं और लगातार उनके साथ बना रहूंगा। मैंने लालगढ़ में पुलिस प्रताड़ना के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया है।"
महतो ने कहा कि सरकार नक्सली लड़ाकों के साथ उनके नाम को जोड़ कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आगे कहा, "सरकार मुझे नक्सली साबित करना चाहती है, जबकि मैं नक्सली नहीं हूं।"
राज्य सरकार और सुरक्षा बलों ने इसके पहले कहा था कि पीसीएपीए प्रमुख छत्रधर महतो, सिद्धु सोरेन और कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी व बिकाश जैसे नक्सली नेता सुरक्षा बलों की कार्रवाई शुरू होने के बाद इलाके से भाग गए हैं।
पुलिस ने कहा था कि महतो ने बांकुड़ा जिले में, सोरेन ने पश्चिम मिदनापुर के शैलबोनी में और दो अन्य नक्सली नेताओं ने पड़ोस के झारखंड में भाग कर शरण ले रखी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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