बाबरी विध्वंस पर लिब्राहन आयोग ने 17 वर्षो बाद सौंपी रिपोर्ट (लीड-1)
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 'राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद' की घटना के सिलसिले में गठित किए गए लिब्राहन आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम की उपस्थिति में प्रधानमंत्री को यह रिपोर्ट सौंपी।
यह रिपोर्ट चार खंडों में है और व्यापक है। गृह मंत्रालय अब इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगा।
चिदम्बरम ने पत्रकारों से चर्चा में कहा, "मुझे अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है। मिलने के बाद ही मैं कुछ प्रतिक्रिया दे पाऊंगा।"
इस बीच न्यायमूर्ति लिब्राहन ने कहा है कि केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपने के बाद वह स्वतंत्र और राहत महसूस कर रहे हैं।
एक समाचार चैनल से बातचीत में लिब्राहन ने कहा, "मेरे ऊपर किसी का कोई दबाव नहीं था। हम अब स्वतंत्र और राहत महसूस कर रहे हैं।"
यह पूछे जाने पर कि आपके द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल होने का आपको भय नहीं था तो इसके जवाब में लिब्राहन ने कहा, "मुझे किसी बात का भय नहीं था। देश की जनता को यह सब तय करना है।"
उल्लेखनीय है कि छह दिसम्बर 1992 को हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस के 10 दिनों के भीतर लिब्राहन आयोग का गठन किया गया था। 16 मार्च 1993 को आयोग को रिपोर्ट सौंपनी थी। गठन के बाद से अब तक इस आयोग का कार्यकाल 48 बार बढ़ाया जा चुका है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह तथा इस समय भारतीय जनशक्ति पार्टी की अध्यक्ष उमा भारती के बयान भी शामिल किए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications