अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांगा जवाब
न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यामूर्ति ए.के.गांगुली की अवकाशकालीन खंडपीठ ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर इस मामले में हलफनामा दायर करने के लिए कहा है।
अदालत ने यह आदेश अधिवक्ता रविकांत द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर दिया है। इस जनहित याचिका में मुख्यमंत्री मायावती और डा. भीम राव अंबेडकर, कांशी राम जैसे अन्य दलित नेताओं की प्रतिमाएं लगाने पर करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के इस्तेमाल के लिए मायावती के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग की गई है।
रविकांत का दावा है कि अब तक प्रतिमाओं के निर्माण के लिए राज्य कोषागार से 12.58 अरब रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
हालांकि अदालत ने राज्य में जारी स्मारकों व प्रतिमाओं के निर्माण कार्य पर कोई स्थगन आदेश नहीं दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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