अफ़ीम से जुड़ी नीति बदलेगा अमरीका

अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में बड़े पैमाने पर होने वाली अफ़ीम की खेती की समस्या का सामना करने का अपना तरीक़ा बदलने जा रहा है.अमरीका अब अफ़ीम की खेती को नष्ट करने में धन लगाने के बजाय अफ़ग़ान किसानों को अलग-अलग तरह की फ़सलें उगाने के लिए प्रोत्साहित करेगा.
अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने विकसित देशों के समूह जी-आठ की इटली में हुई एक बैठक में कहा कि अफ़ीम उगाने वालों के विरुद्ध मौजूदा क़दम 'विफल' रहे हैं. इस सम्मेलन में संगठन के विदेश मंत्रियों ने अफ़ग़ानिस्तान में अगस्त में होने वाले आम चुनाव को विश्वसनीय तौर पर कराने की भी अपील की.
हॉलब्रुक ने कहा कि अफ़ीम की खेती बंद कराने के जो मौजूदा कार्यक्रम थे उनसे इस खेती की वजह से होने वाली तालेबान की कमाई में एक डॉलर का भी फ़र्क नहीं पड़ा. उन्होंने कहा, "फ़सल नष्ट करने से सिर्फ़ किसानों को ही नुक़सान होता है और वे फ़सल कहीं और उगा लेते हैं. हमने फ़सल नष्ट करने के लिए जो करोड़ों डॉलर ख़र्च किए उनसे तालेबान को कोई नुक़सान नहीं हुआ है."
निष्पक्ष चुनाव
अफ़ग़ान किसान फ़सल नष्ट किए जाने पर दूसरी जगह अफ़ीम की फ़सल उगा लेते हैं. हॉलब्रुक के अनुसार इससे उलट तालेबान को इससे लोगों को संगठन में शामिल करने में मदद ही मिली है.
हॉलब्रुक ने कहा कि अब भविष्य में अफ़ीम की फ़सल नष्ट करने का कार्यक्रम धीरे-धीरे करके रोक दिया जाएगा और उसकी बजाय वही धन किसानों को दूसरी फ़सलें उगाने में मदद के लिए दिया जाएगा. सम्मेलन में आए सदस्यों ने इस क़दम का स्वागत किया है.
एक सदस्य ने तो ये भी कहा कि फ़सल नष्ट करने का कार्यक्रम उपहास का विषय हो गया था. इटली के विदेश मंत्री फ़्रांको फ़्रातिनि ने कहा कि जी-आठ ने अफ़ग़ानिस्तान के आम चुनाव में तालेबान के शामिल होने की राष्ट्रपति हामिद करज़ई की अपील का भी समर्थन किया.
रिचर्ड हॉलब्रुक ने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता सरकार की वैधता की सूचक होगी. उन्होंने कहा, "हमने अभी एक बहुत ही बुरा उदाहरण पड़ोस में ही ईरान में देखा है."


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