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हिंसा के बावजूद हटेगी अमरीकी सेना

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Iraq

इराक़ में पिछले हफ़्ते हिंसा में 250 लोगों के मारे जाने के बावजूद अगले सप्ताह शहरों से अमरीकी सेना हटाने की योजना के तहत पुख़्ता सुरक्षा इंतज़ाम हो रहे हैं.इराक़ी सरकार के साथ एक समझौते के तहत इराक़ में एक लाख 33 हज़ार अमरीकी सैनिकों में से अधिकतर 30 जून तक शहरों और नगरों को छोड़ कर सैन्य अड्डों में चले जाएँगे.

इराक़ में अमरीकी सैनिक संघर्ष क्षेत्रों में लड़ाई सितंबर 2010 तक बंद कर देंगे और सभी अमरीकी सैनिक 2011 तक इराक़ को छोड़कर अपने देश लौट जाएँगे.

छुट्टियाँ रद्द

सभी पुलिस कर्मचारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है. अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात किया जा रहा है. हमलावर इराक़ी लोगों के दिलों में ख़ुशी बर्दाश्त नहीं कर सकते. उन्होंने अपने मक़सद साफ़ कर दिए हैं. लेकिन इससे हमने जो करने की योजना बनाई है उसके बारे में हमारे निश्चय पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हमने निश्चय किया है कि सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमारी अपनी सेना और पुलिस बल संभालें   प्रधानमंत्री नूर अल मलिकी

 हमलावर इराक़ी लोगों के दिलों में ख़ुशी बर्दाश्त नहीं कर सकते. उन्होंने अपने मक़सद साफ़ कर दिए हैं. लेकिन इससे हमने जो करने की योजना बनाई है उसके बारे में हमारे निश्चय पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हमने निश्चय किया है कि सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमारी अपनी सेना और पुलिस बल संभालें

प्रधानमंत्री नूर अल मलिकी ने विश्वास जताया है कि उनका सुरक्षा अमरीकी सैनिकों के शहरों से हट जाने के बाद भी नागरिकों को सुरक्षा प्रदान कर पाएगी.

उनका कहना है, "हमलावर इराक़ी लोगों के दिलों में ख़ुशी बर्दाश्त नहीं कर सकते. उन्होंने अपने मक़सद साफ़ कर दिए हैं. लेकिन इससे हमने जो करने की योजना बनाई है उसके बारे में हमारे निश्चय पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हमने निश्चय किया है कि सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमारी अपनी सेना और पुलिस बल संभालें."

उनका कहना था कि 'विद्रोही हिंसक गतिविधियों के ज़रिए सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना चाहते हैं और ऐसे में नागरिकों को एकजुटता बनाए रखनी चाहिए.' अमरीकी सेना बग़दाद जैसे बड़े शहरों से अपने सैन्य अड्डे पहले ही बाहर ले जा चुकी है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस कदम के बावजूद अमरीकी सैनिक बहुत दूर नहीं हैं और वे शहरी इलाक़ों से कुछ ही दूरी पर बाहर तैनात हैं ताकि यदि उनकी ज़रूरत पड़े तो वे इराक़ी सुरक्षा बलों के समर्थन में जल्द ही आ पाएँ.

इस हफ़्ते हुए अधिकतर हमले शिया बहुल क्षेत्रों में हुए हैं जिसके बाद इराक़ी प्रशासन ने अल क़ायदा के सुन्नी चरमपंथियों पर इसका दोष लगाया है.इससे पहले चरमपंथियों के बाज़ारों में आम नागरिकों को निशाना बनाने के कारण सरकार ने शहरी इलाक़ों में सुरक्षा कड़ी कर दी है.

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