प्यार बचपन में और शादी पचपन में
लखनऊ, 28 जून (आईएएनएस)। राशिद अहमद को 20 साल की उम्र में एक लड़की से प्यार हुआ। जब प्यार नहीं मिला तो किसी और से शादी न करने की उन्होंने कसम खा ली। 35 साल तक महबूबा के इंतजार में कंवारे रहे लेकिन उम्र का 55वां बसंत देखने के बाद आखिर उन्हें अपनी मुहब्बत मिल ही गई।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर के कठगर इलाके में रहने वाले 55 वर्षीय राशिद अहमद ने गत शुक्रवार को अपनी 53 वर्षीय महबूबा चांदनी से घरवालों की मर्जी से शादी की। काजी मौलाना इकबाल ने दोनों का निकाह पढ़वाया। निकाह के बाद जोरदार दावत भी हुई।
काजी मौलाना इकबाल ने कहा कि दोनों के परिजनों की सहमति के बाद बहुत धूमधाम से यह निकाह हुआ। उन्होंने कहा कि दूल्हे राशिद ने अपनी महबूबा चांदनी का 35 साल तक इंतजार किया। यह प्रेमी जोड़ा उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो माशूका का इंतजार करने की बजाय जज्बात में आकर गलत कदम उठा लेते हैं।
वर्ष 1974 में राशिद की अपनी पड़ोसी चांदनी से आंखे चार हुई थी। देखते ही देखते दोनों एक दूसरे से बेपनाह मुहब्बत करने लगे। जब घरवालों से शादी की बात की तो चांदनी के घरवाले इस रिश्ते के लिए राजी नहीं हुए और उसे लेकर दूसरी जगह चले गये। एक दूसरे से बिछड़ने के बाद दोनों ने शादी नहीं की।
35 साल बाद चांदनी के माता-पिता की मौत के बाद उसके घर वाले पिछले साल फिर से पुराने में रहने आ गये। जब घर वालों को पता चला कि राशिद ने सिर्फ चांदनी के लिए अपनी शादी नहीं की तो उन्होंने दोनों की शादी कराने का फैसला किया।
राशिद बाकायदा बारात लेकर चांदनी के घर पहुंचा। धूमधाम से निकाह की सारी रश्में अदा की गईं। उम्र के इस पड़ाव पर अपनी महबूबा को पाकर राशिद मियां की खुशी का ठिकाना नहीं है।
राशदि कहते हैं, "मैं खुशनसीब हूं कि मुझे देर से ही सही पर अपना प्यार मिल गया। इसके लिए मैं अल्लाह का आभारी हूं। मैं चांदनी को आज भी उतनी ही मुहब्बत करता हूं जितनी 35 साल पहले करता था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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