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वैकल्पिक होगी बोर्ड की परीक्षा

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Kapil Sibal
नई दिल्ली। दसवीं के छात्रों को अब बोर्ड परीक्षा से डरने की ज़रुरत नहीं है क्योंकि बोर्ड की परीक्षा देने या न देने का फैसला अब विद्यार्थी खुद कर सकेंगे। दरअसल केंद्र सरकार दसवीं की बोर्ड परीक्षा को वैकल्पिक बनाने की तैयारी कर रही है।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि दसवीं में बोर्ड परीक्षा के चलते छात्रों और उसके अभिभावकों को बड़े तनाव से गुजरना पड़ता है। लिहाजा सरकार दसवीं की बोर्ड परीक्षा को वैकल्पिक करना चाहती है'। उन्होंने कहा कि जब तक बच्चे को विश्वविद्यालय या कालेज स्तर के पूर्व किसी खास पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए बोर्ड पास करना जरूरी न हो, तब तक दसवीं में बोर्ड की परीक्षा जरूरी नहीं होनी चाहिए।

उच्च शिक्षा एवं शोध को बेहतर बनाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यशपाल समिति और राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए 100 दिन के कार्यक्रम की घोषणा की है। जिसके तहत बोर्ड की परीक्षा का वैकल्पिक होने के साथ ही शिक्षा में कैपिटेशन फीस और पाठ्यक्रमों के बारे में धोखाधड़ी करने वालों को सजा के लिए नया कानून भी बनेगा। इतना ही नहीं, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए बैंकों से कर्ज लेने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के ब्याज का भुगतान भी सरकार ही करेगी।

इसके अलावा उच्चतर शिक्षा व शोध के लिए नियामक प्राधिकरण और उच्च शिक्षा में अनिवार्य मूल्याकंन और प्रत्यायन की बाबत स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण के लिए कानून बनाने की पहल भी की जाएगी। साथ ही शिक्षकों, प्रबंधन, कर्मचारियों व छात्रों के विवादों को निपटाने के लिए ट्रिब्युनल भी बनेगा।

कपिल सिब्बल ने बताया कि इन सौ दिनों के भीतर ही शिक्षा का अधिकार विधेयक को संसद में पारित कराने और अखिल भारतीय मदरसा बोर्ड के लिए आम राय बनाने की कोशिश की जाएगी। सिब्बल ने अल्पसंख्यक बहुल आबादी वाले सौ जिलों में माडल डिग्री कालेज खोलने, पांच हजार विश्वविद्यालयों, कालेजों को ब्राडबैंड इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने का भी ऐलान किया।

सिब्बल ने कहा कि सूचना संचार तकनीक का विस्तार माध्यमिक शिक्षा में भी होगा। कांग्रेस पार्टी ने तीन साल में सभी गांवों को ब्राडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ने का वायदा किया है। इसके जरिए ही उसे भी पूरा किया जाएगा। साथ ही अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए कोचिंग की व्यवस्था सुदृढ़ करने और वंचितों के मसलों को निपटाने के लिए हर विश्वविद्यालय में 'समान अवसर केंद्र' भी खोले जाएंगे।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल समिति की सिफारिशों का अध्ययन हो रहा है इसके बाद ही फैसला किया जाएगा कि किन सिफारिशों को लागू किया जाए और किसे नहीं।

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