अब मुफ़्त अनिवार्य शिक्षा पर बिल

भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल शिक्षा व्यवस्था में अगले 100 दिनों के दौरान कुछ अहम सुधारों की कोशिश कर रहे हैं... क्या हैं ये सुधार..? उन्होंने कहा है कि मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा हर बच्चे का, किशोर का अधिकार है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है.
दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए जब उन्होंने अपने मंत्रालय की ओर से अगले 100 दिनों के कामकाज की रूपरेखा सामने रखी तो कई अहम सुधारों की कोशिश का खाका खींच दिया.
केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल देशभर में हर छात्र को केवल एक बार बोर्ड परीक्षा देने की ज़रूरत होती है और वो भी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए. बार बार विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के दबाव में नहीं लाना चाहिए. 10वीं का बोर्ड वे छात्र दें जिन्हें 10वीं कक्षा के बाद ही विश्वविद्यालयों में शुरू होने वाले पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना हो. बाकी 10वीं कक्षा से सीधे 11वीं में जा पाएं, ऐसा करने की ज़रूरत है
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मसलन, सदन में इसी सत्र के दौरान अनिवार्य और मुफ़्त शिक्षा पर एक विधेयक लागू कराने का प्रयास, ऑल इंडिया मदरसा बोर्ड में सुधार, मदरसों में शिक्षा स्तर में सुधार, सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच पार्टनरशिप, आईटी का बेहतर इस्तेमाल, ग्रेडिंग सिस्टम से मूल्यांकन, केवल एक बोर्ड परीक्षा का प्रावधान और शिक्षा ऋण पर आने वाले ब्याज़ का मंत्रालय की ओर से भुगतान जैसे कई अहम सुधारों की बात कपिल सिब्बल ने बताई है.
हालांकि इस बारे में अभी कुछ कहा जाना जल्दबाज़ी है कि इन योजनाओं की किस हद तक और कबतक सरकार अमलीजामा पहना पाएगी क्योंकि यह राज्य सरकारों के साथ मंत्रालय के तालमेल और समझौतों पर निर्भर करेगा.
कई अहम घोषणाएं
कपिल सिब्बल ने कहा, "देश की 50 करोड़ से भी ज़्यादा आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है. ऐसे में 12वीं पास करके ग्रेजुएशन तक जाने वाले छात्रों का प्रतिशत 12.4 ही है. इसे सुधारने और ऊपर लाने की ज़रूरत है क्योंकि सरकार अगर बाकी के 86-87 फीसदी छात्रों को शिक्षा नहीं दे पाएगी तो इससे देश का भविष्य ख़तरे में आएगा."
कुछ अहम प्रयासों की झलक... शिक्षा ऋण पर ब्याज़ सब्सिडी दी जाए राष्ट्रीय स्तर पर एक बोर्ड का प्रावधान हो माध्यमिक विद्यालयों की रेटिंग के लिए स्वतंत्र निकाय संस्थानों की मान्यता के लिए स्वतंत्र निकाय कठिन और उच्च मानकों के आधार पर विश्वविद्यालय की मान्यता अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कार्ययोजना मदरसों में शिक्षा को आधुनिक बनाने पर ज़ोर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए शिक्षा के बेहतर विकल्प विकसित करना ऑल इंडिया मदरसा बोर्ड में सुधार अगले तीन साल में हर गांव तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा 41 हज़ार छात्रों, 41 हज़ार छात्राओं को सीधे बैंक खातों में छात्रवृत्ति पत्राचार के ज़रिए शिक्षा पर एक राष्ट्रीय नीति तैयार करना
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार धार्मिक शिक्षा में कोई दखल नहीं देना चाहती पर मदरसों में पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री का स्तर ऊपर ले जाने से वहाँ पढ़नेवालों को मदद मिलेगी.
साथ ही यह भी बताया गया कि सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप जैसी योजनाओं को भी लागू करने के बारे में सोच सकती है ताकि निजी क्षेत्र के लोगों को जगह मिले और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों जैसी शिक्षा मिल सके.
पर सबसे अहम घोषणाओं में से एक है 10वीं की बोर्ड परीक्षा को वैकल्पिक बनाना. उन्होंने कहा, "देशभर में हर छात्र को केवल एक बार बोर्ड परीक्षा देने की ज़रूरत होती है और वो भी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए. बार बार विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के दबाव में नहीं लाना चाहिए. 10वीं का बोर्ड वे छात्र दें जिन्हें 10वीं कक्षा के बाद ही विश्वविद्यालयों में शुरू होने वाले पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना हो. बाकी 10वीं कक्षा से सीधे 11वीं में जा पाएं, ऐसा करने की ज़रूरत है."
साथ ही उन्होंने कहा कि अंकों के बजाय ग्रेड सिस्टम लागू होना चाहिए. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने घोषणा की कि यूजीसी और एआईसीटीई जैसी अन्य मान्यता देने वाली संस्थाओं को अब एक स्वतंत्र निकाय के अधीन लाने की ज़रूरत है.
उत्तर प्रदेश में भी नए प्रावधान
उधर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने भी राज्य में विद्यार्थियों को कुछ राहत देते हुए अहम घोषणाएं कर दी हैं. उन्होंने गुरुवार को एक प्रेसवार्ता के ज़रिए बताया कि राज्य में अब अंकतालिका पर डिवीज़न का ज़िक्र नहीं किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि मूल्यांकन के लिए अंकों के अलावा ग्रेडिंग की भी व्यवस्था होगी. हालांकि ऐसा अगले सत्र से ही लागू हो पाएगा. वर्ष 2010 तक इन नई घोषणाओं के लागू होने का इंतज़ार करना पड़ेगा.


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