शुष्क बेर की झाड़ियाँ बनेंगी वरदान
कृषि विज्ञान केन्द्र बीछवाल के उद्यान विशेषज्ञों ने इसके लिए पूरे जिले में अभियान चलाया है। राज्य में चल रहे खरीफ कृषि आदान शिविरों में देशी बेर की झाड़ियों में कलम चढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कोलायत तहसील के अनेक कृषकों को इस तकनीक का काफी लाभ हुआ है।
कृषि विश्वविद्यालय के उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. अतुल चन्द्र ने कोलायत जैसी बंजर भूमि पर सूखे बेर की झाड़ियों पर कलम चढ़ाकर उपयोग करने पर प्रकाश डाला। इससे एक पौधे से औसतन 100 किलोग्राम बेर एक मौसम में प्राप्त किए जा सकते हैं। शुष्क क्षेत्र की कम पानी वाली बेर की फसल से 25 से 30 हजार रुपये की आमदनी हो सकती है। इसमें विटामिन "सी", खनिज तत्व लौह पर्याप्त शर्करा होती है। अत: यह कुपोषण से दूर रखता है। इनकी पत्तियाँ मई-जून माह में पशुओं के लिए पौष्टिक होती हैं और व्यापारिक रूप से भी लाभप्रद होती है।
लाभदायक फसल और कम लागत में तैयार होने के कारण राज्य में इसकी सुनियोजित खेती शुरू हो गई है। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए अनुदान भी मुहैय्या करवाया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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