ईरान: ओबामा ने हिंसा की 'निंदा' की

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की जीत का विरोध करने वाले लोगों को 'अन्यायपूर्ण' तरीके से दबाने की कड़ी आलोचना की है.
पहली बार ईरान के राष्ट्रपति चुनावों पर खुलकर बोलते हुए राष्ट्रपति ओबामा का कहना था कि वो लोगों को धमकी देने, मारपीट करने और जेल भेजे जाने से आहत हैं.
राष्ट्रपति ओबामा ने इस बात को ग़लत और बेबुनियाद बताया कि अमरीका और अन्य पश्चिमी देश ईरान के मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं.
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि ये आरोप ग़लत और बेबुनियाद है कि अमरीका और अन्य पश्चिमी देश ईरान के मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं।
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उनका कहना था कि वो ईरान की प्रभुसत्ता का आदर करते हैं. उनका ये भी कहना था कि चुनाव की ईरान के लोगों की निगाह में वैधानिकता ज़रूरी है, न कि अमरीकी लोगों की निगाह में.
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि ईरानी लोग अपने आप मुखर हुए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि विचारों को दबाने की कोशिशें कभी सफल नहीं हुई है.
नतीजों का विरोध
दूसरी ओर ईरान की सर्वोच्च संस्था गार्डियन काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह इस महीने राष्ट्रपति पद के लिए हुए विवादास्पद चुनावों को रद्द नहीं करेगी.
सरकारी ईरानी टीवी चैनल प्रेस टीवी ने काउंसिल के प्रवक्ता के हवाले से कहा था कि काउंसिल को मतदान में धाँधली के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं. ईरान संकट पर सख़्त रवैया न अपनाने के लिए बान की मून की आलोचना हुई थी.
ईरान में 12 जून को राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव पर विवाद खड़ा होने के बाद वहाँ पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें जारी हैं और स्थिति ख़ासी तनावपूर्ण बनी हुई है.
इस चुनाव के नतीजे में महमूद अहमदीनेजाद को दो-तिहाई मतों के साथ विजयी घोषित किया गया था. उधर विपक्ष ने धाँधली का आरोप लगाते हुए दोबारा चुनाव कराए जाने की माँग की है.
इससे पहले ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली ख़ामनेई ने भी राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनावों के नतीजों को सही ठहराते हुए प्रदर्शनकारियों को चेताया था कि वे प्रदर्शन बंद करें और यदि उन्हें नतीजे पर आपत्ति है तो अदालत का दरवाज़ा खटखटाएँ.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने दस दिन में ईरान संकट पर दूसरे बयान में चुनावों के बाद देश में आम नागरिकों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर निराशा जताई. बान की मून ने ईरान से अनुरोध किया है कि वह तत्काल गिरफ़्तारियाँ, बल प्रयोग और धमकियाँ देना बंद करे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव की आलोचना हुई थी कि वे मानवाधिकारों के मुद्दे पर सख़्त रवैया नहीं अपना पाए हैं. अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने भी ईरान की सरकार की ओर से जारी हिंसक कार्रवाई की आलोचना की थी.
अनेक यूरोपीय देशों ने भी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा का विरोध किया है. ब्रिटेन ने कहा है कि वह ईरान में मौजूद अपने राजनयिकों के परिवारों को देश से बाहर निकाल रहा है.


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