पाकिस्तान में सरबजीत की याचिका खारिज, भारत का मानवीय रूख अपनाने का आग्रह (राउंडअप)
सरबजीत पर वर्ष 1990 में लाहौर में चार बम धमाकों को अंजाम देने का आरोप है। इन धमाकों में 14 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद सरबजीत को 1991 में फांसी की सजा सुनाई गई थी। तभी से वह पाकिस्तान के कोट लखपत जेल में बंद है।
अदालत का यह फैसला न्यायमूर्ति रजा फैयाज के नेतृत्व वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सुनाया। फैसला आने के साथ ही भारत में पंजाब स्थित भिकिविंड गांव में सरबजीत के परिवार में मायूसी छा गई।
इधर, नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने स्वीकार किया कि सरबजीत का मामला भारत में लोगों की भावनाओं से जुड़ गया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने सरबजीत सिंह को मृत्युदंड से मुक्त करने के लिए पाकिस्तान से लगातार अपील की है और आगे भी इसे जारी रखेगा।
उन्होंने कहा, "हमने पाकिस्तान सरकार से लगातार कहा है कि सरबजीत के मामले में वह सहानुभूतिपूर्ण व मानवीय दृष्टिकोण अपनाए। हमें उम्मीद है कि पाकिस्तान ऐसा कर पाने में सक्षम होगा।"
उधर, सरबजीत के वकील ने कहा कि वह अदालत में इसलिए उपस्थित नहीं हो सका, क्योंकि उसे पंजाब प्रांत में एक कानून अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जा चुका है। उसने अपने एक साथी वकील से अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा था लेकिन वह उपस्थित नहीं हो सका।
इधर भिकिविंड में सरबजीत की पत्नी ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी वकील ने लाखों रुपये की मांग की थी। लेकिन सरबजीत का परिवार इतनी कीमत अदा करने में समर्थ नहीं हो पाया।
सरबजीत के परिजनों ने सरबजीत को निर्दोष बताया है। परिजनों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए 9 मार्च 2006 को पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
एक अप्रैल 2008 को उन्हें फांसी देने की तारीख मुकर्रर की गई थी लेकिन नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने अपने अधिकारियों से सरबजीत की फांसी के मामले की समीक्षा करने को कहा था।
सरबजीत की पुत्री पूनम ने कहा, "यह सुनकर हम हैरान हैं। हमने कभी उम्मीद नहीं की थी कि मेरे पिता की याचिका को इस तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया जाएगा कि उनका वकील उपस्थित नहीं हुआ।"
पूनम ने कहा, "मेरे पिता की जिंदगी की रक्षा के लिए भारत सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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