स्वास्थ्य मंत्री ने गर्मी एवं लू से बचने के नुस्खे सुझाए
खान का कहना है कि गर्मी के प्रकोप से बच्चे, वृद्घ, गर्भवती महिलाएं, धूप में कार्यरत श्रमिक, यात्री व खिलाड़ी अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि सिर का भारीपन व सिरदर्द, अधिक प्यास लगना व शरीर में दर्द के साथ थकावट आना, जी मिचलना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढ़ना, त्वचा का सूखा होना, मुंह लाल होना तथा बेहोशी जैसी स्थिति "लू-तापघात" के मुख्य लक्षण है।
उन्होंने बताया कि ये लक्षण शरीर में लवण की आवश्यकता व अनुपात विकृति की वजह से होते है। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क का एक केन्द्र जो मानव के तापमान को सामान्य बनाए रखता है, वह ऐसी स्थिति में काम करना छोड़ देता है। लाल रक्त कोशिकाएं रक्त वाहिनियों के टूट जाने से कोशिकाओं का पोटेशियम लवण रक्त संचार में आ जाता है जिससे हृदय की गति व शरीर के अन्य अवयव प्रभावित होने से रोगी की जान भी जा सकती है।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि गर्मी से अपने आपको बचाने के लिए धूप में निकलने से पहले ताजा भोजन कर उचित मात्रा में ठंडे जल का सेवन करे तथा थोड़े-थोड़े अन्तराल में शीतल पेय ले। धूप में आवश्यक होने पर जाएं तो पतले कपड़े से सिर व बदन ढंके तथा छाते का उपयोग करें। उन्होंने श्रमिकों के कार्यस्थल पर छाया एवं पानी का पूर्ण प्रबंध करने की सलाह दी है जिससे अकाल राहत कायरे के श्रमिक थोड़ी-थोड़ी देर में विश्राम कर सकें।
उन्होंने लू-तापघात के रोगी को तत्काल उपचार के लिए चिकित्सा संस्थान में ले जाने की सलाह देते हुए तथा बताया कि प्रारम्भ में प्रभावित रोगी को छायादार ठण्डे स्थान पर लिटाएं, उसका गीले कपड़े से स्पंज करते रहे एवं उसे निरन्तर ठंडे पदार्थ पिलाते रहना चाहिए। उन्होंने इस सम्बन्ध में चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश भी दिए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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