वार्ता के पक्षधर उल्फा के धड़े ने भूमिगत होने की धमकी दी

तिनसुकिया, 22 जून (आईएएनएस)। एकपक्षीय संघर्षविराम की घोषणा के एक साल बाद भी सरकार की तरफ से शांति वार्ता शुरू करने की पहल न करने का आरोप लगाते हुए युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के बातचीत के पक्षधर धड़े ने एक बार फिर जंगलों की राह पकड़ने की धमकी दी है।

उल्फा के इस धड़े के नेता जितेन दत्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "संघर्षविराम की हमारी घोषणा के बाद पिछले एक साल में पूवरेत्तर असम में हिंसा की एक भी वारदात नहीं हुई है। हमने अपनी मांगें भी बदलीं और रुख भी नरम किया। संप्रभुता और स्वतंत्रता की अपनी मांग को हमने स्वायत्तता में बदल दिया लेकिन इसके बावजूद न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने वार्ता की कोई पहल की।"

दत्ता ने कहा, "हमने वार्ता और संघर्षविराम का रास्ता इसलिए अख्तियार किया था क्योंकि हमें लगा कि उल्फा का केंद्रीय नेतृत्व असम के कल्याण और राज्य की समस्याओं के समाधान को लेकर कतई चिंतित नहीं था। एक साल के संघर्षविराम के बाद हमें लगता है कि सरकार और विभिन्न समूहों, संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।"

उन्होंने कहा, "सरकार सिर्फ शिविरों की स्थापना करके अपने फर्ज की इतिश्रि नहीं कर सकती। हम सरकार की सक्रिय भूमिका चाहते हैं लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पा रहा है।"

दत्ता ने कहा, "सरकार के रवैये को देखकर हमारे कार्यकर्ता एक बार फिर जंगलों का रुख करना चाहते हैं। हमारे नेता अधिक से अधिक स्वायत्तता की मांग जारी रखेंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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