राजस्थान के लिए विशेष दर्जे और केन्द्रीय करों में 40 प्रतिशत हिस्से की मांग
गहलोत सोमवार को यहां शासन सचिवालय के सभा कक्ष में आयोग के साथ राज्य सरकार की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। प्रदेश में पेयजल की गम्भीर समस्या की ओर आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान में पिछले साठ सालों में से कमोबेश 55 सालों तक अकाल और सूखे की स्थिति रही है और इन विकट स्थितियों में भी राजस्थान प्रगति कर रहा है। उन्होंने पेयजल के लिए राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग रखते हुए कहा कि जनता तक सेवाओं और सुविधाओं को पहुँचाने के लिए अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश में लागत ज्यादा आती है। इसे देखते हुए राज्य द्वारा लगातार कई वर्षो से विशेष दर्जे की मांग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य का क्षेत्रफल पूरे देश का 10 प्रतिशत है, जिसमें से 65 प्रतिशत रेगिस्तानी क्षेत्र है जबकि जल की उपलब्धता पूरे देश का एक प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पानी को लेकर हालात बिगड़ते जा रहे हैं तथा 232 में से मात्र 32 ब्लॉक ही सुरक्षित बचे हैं। प्रदेश की भूजल पर निर्भरता को रेखांकित करते हुए उन्होंने किसानों और लोगों की मांग से आयोग को अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि राज्य में भूजल का दोहन लगभग 137 प्रतिशत है जबकि गुजरात में 47, उत्तरप्रदेश में 70, आन्ध्रप्रदेश में 45, तमिलनाडु में 85 एवं महाराष्ट्र में 48 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राज्य पेयजल की दृष्टि से गम्भीर संकट के दौर से गुजर रहा है ऐसे में समय रहते इस ओर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में आरम्भ महत्वाकांक्षी "हरित राजस्थान" अभियान की भी जानकारी दी और कहा कि इसका लोगों में अच्छा संदेश पहुँचा है।
गहलोत ने आगामी एक अप्रेल से लागू होने वाले जीएसटी का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्व पर इसके प्रभाव का आंकलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुधारों के पक्ष में है, लेकिन जीएसटी जैसी नई व्यवस्था सभी राज्यों की आम सहमति के पश्चात ही लागू की जानी चाहिए। साथ ही राज्यों को घाटा होने की स्थिति में भारत सरकार द्वारा इसकी शत-प्रतिशत क्षतिपूर्ति होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी को 30.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्यों के हिस्से का निर्धारण भौगोलिक क्षेत्रफल एवं प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर की जाए। इसके अतिरिक्त 1971 की जनगणना के बजाय 2001 की जनगणना के आधार पर राज्यों के मध्य उनके हिस्से का निर्धारण होना चाहिए।
13वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. विजय केलकर ने राज्य सरकार द्वारा विाीय व्यवस्था में सुधार के लिए किए गए कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि राजस्व और विाीय घाटे को कम करने के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में उठाए गए महत्वपूर्ण मुहों की ओर इंगित करते हुए कहा कि भविष्य में योजना और विाीय सुदृढ़ीकरण के लक्ष्यों के बारे में इन पर विचार करने का भरोसा दिलाया। डॉ. केलकर ने कहा कि सार्वजनिक निजी साझेदारियों को प्रोत्साहित करने तथा प्रयोक्ता प्रभारों के आधार सहित और अधिक राजकोषीय सुधारों के स्वरूप पर राज्य सरकार के विचार आयोग के लिए उपयोगी होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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