दिल्ली में 52 बाल बंधुआ मजदूर मुक्त

सभी बाल मजदूरों को पुलिस और श्रम विभाग ने एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ)के सहयोग ने मुक्त कराया। इन बाल मजदूरों से जरी का काम करवाया जा रहा था।

बाल मजदूरों की आयु करीब 8 से 14 साल बीच है। इनमें से अधिकतर बच्चे बिहार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बताए जाते हैं। सभी बच्चों के उज्‍जवल भविष्य का वादा करके एक व्यक्ति इन्हें यहां लाया था।

छुड़ाए गए बच्चे में से फिरोज ने बताया कि एक साल पहले एक परिचित उसके पिता को 700 रुपया देकर मदरसे में रखने का वादा कर उसे यहां लाया।

उसने बताया कि दिल्ली आते ही उसकी कहानी कुछ और हो गई। यहां आते ही उसे जरी के काम में लगा दिया गया। उसे 12-13 घंटे काम करवाया जाता। साथ ही काम न करने पर उसकी पिटाई भी की जाती।

बचपन बचाओं आंदोलन (बीबीए) के कैलाश सत्यार्थी ने बताया कि बच्चों की स्थिति बहुत ही खराब थी। उन्हें जेल की तरह घर में रख कर दिन रात काम करवाया जा रहा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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