'फिर से खड़े होंगे, रचनात्मक सहयोग देंगे'

वहीं विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि वो पार्टी को फिर से खड़ा करने का काम करेंगे.
उन्होंने कार्यकारिणी की बैठक में कहा है कि धर्मनिरपेक्षता की सही परिभाषा को देशभर में फिर से बहस के ज़रिए सामने लाने की ज़रूरत है. साथ ही दो ध्रुवीय राजनीति के लिए देश के जनादेश ने स्पष्ट संकेत दिए हैं और पार्टी को इस दिशा में अपनी भूमिका निभानी होगी क्योंकि पार्टी इन चुनावों में दूसरे सबसे बड़े धड़े के तौर पर सामने आई है.
नई दिल्ली में रविवार को संपन्न हुई पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडु और रविशंकर प्रसाद प्रेस से बातचीत करने आए.
वैंकेया नायडु ने कहा, "स्वाभाविक है कि जिस तरह के प्रदर्शन की पार्टी को उम्मीद था, वैसा नहीं हुआ. इससे थोड़ा असंतोष तो है पर हम आगे के लिए तैयार हैं. देश दो ध्रुवीय राजनीति की ओर बढ़ रहा है और हम उसके लिए तैयार हैं."
उन्होंने कहा, "पार्टी मौजूदा सरकार की कमियों को भी इसबार प्रभावी ढंग से सामने लाएगी और पार्टी के अंदर की कमियों, तैयारियों के लिए आत्ममंथन, चिंतन किया जाएगा."
कोई एक ज़िम्मेदार नहीं
पार्टी की कार्यकारिणी बैठक के शुरू होने पर पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा था कि कहा था, "विजय होती है तो श्रेय सामूहिक होता है, इसलिए हार की ज़िम्मेदारी भी सामूहिक होती है. लेकिन लोगों को लगता है कि किसी एक व्यक्ति को ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, तो अध्यक्ष के रूप में मैं इसकी ज़िम्मेदारी लेता हूँ."
वैंकेया नायडु, वरिष्ठ नेता स्वाभाविक है कि जिस तरह के प्रदर्शन की पार्टी को उम्मीद था, वैसा नहीं हुआ. इससे थोड़ा असंतोष तो है पर हम आगे के लिए तैयार हैं. देश दो ध्रुवीय राजनीति की ओर बढ़ रहा है और हम उसके लिए तैयार हैं
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पर रविवार को बैठक के बाद पार्टी के इस बारे में विचार से अवगत कराते हुए वैकेया नायडु ने कहा कि पार्टी अपने व्यक्ति नहीं, पार्टी के सिद्धांत पर कायम है. पार्टी अध्यक्ष ने ज़िम्मेदारी लेने की बात कही थी पर पार्टी की ओर से उन्हें कहा गया है कि वो ऐसा न सोचें और आगे काम करते रहें.
इस कार्यकारिणी के बाद जो बातें कही गईं, उनमें से अधिकतर ऐसी हैं जो जनादेश के बाद से पार्टी दोहराती आ रही है. हाँ, मगर कुछ मुद्दों पर पार्टी कार्यकारिणी की बैठक के दौरान खुलकर सवाल भी उठे.
चर्चा हिंदुत्व की भी हुई और पार्टी ने बाद में पत्रकारों को बताया कि हिंदुत्व की परिभाषा एक ही है. दूसरे को नुकसान न पहुँचाना और अपनी जीवन पद्धति के अनुसार आगे बढ़ते रहना. किसी सख़्त हिंदुत्व की भाप पार्टी की भाषा से उठती नहीं दिखी.
बात वरुण गांधी की भी उठी पर इसपर आधिकारिक तौर पर पार्टी ने कोई साफ़ टिप्पणी नहीं की. साथ ही पार्टी के अंदर अनुशासन की बात भी कठोर शब्दों में दोहराई गई.
वैकेया नायडु ने यह भी कहा कि कुछ बयानबाज़ियों और मीडिया के ज़रिए सामने आई बातों की वजह से पार्टी के कार्यकर्ताओं के मन में चिंता पैदा हुई है और कहा कि बाहर बोलना एक बीमारी है जिससे बचना चाहिए.
कुछ दिनों पहले सार्वजनिक रूप से कई नेताओं की बयानबाज़ी के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि पार्टी अपने अंदरुनी मामलों को सार्वजनिक नहीं करना चाहती और ऐसा करना अनुशासनहीनता माना जाएगा.
बहरहाल, कार्यकारिणी की बैठक के बाद पार्टी पूरी समीक्षा के लिए चिंतन बैठक करने जा रही है पर ऐसा बजट सत्र के बाद होना तय हुआ है. फिलहाल कार्यकारिणी की बैठक बिना किसी बड़े फैसले या बदलाव के समाप्त हो गई है.


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