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पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए सक्रिय होंगे आडवाणी (राउंडअप)

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लोकसभा चुनाव के बाद हुई पार्टी की पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के समापन अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि पार्टी बेशक चुनाव हार गई हो लेकिन अभी भी उसमें वापसी करने का माद्दा है। उन्होंने कहा कि इस हार के बाद यह कहना कि पार्टी चूक गई है और खत्म होने की कगार पर है, बिल्कुल गलत है।

उन्होंने कहा, "चुनाव में हमें वैसे परिणाम नहीं मिले जिसकी हमने अपेक्षा की थी। हमें ईमानदारी से आत्मचिंतन करना चाहिए। लेकिन आत्मचिंतन का अर्थ दूसरे पर अंगुलियां उठाना नहीं है। "

उन्होंने कहा, "पार्टी के समक्ष क्या चुनौतियां है और उसे क्या करना है, इस बारे में पार्टी कार्यकर्ताओं को अवगत कराने के लिए मैं पूरे देश की यात्रा करूंगा। सभी राज्यों में जाऊंगा। जो बड़े राज्य हैं वहां के अन्य स्थानों पर जाऊंगा।"

आडवाणी ने पार्टी में सभी स्तर पर युवाओं को आगे लाने के लिए एक व्यवस्था बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा, "पार्टी को तुरंत एक ऐसी व्यवस्था विकसित करनी पड़ेगी जिससे हर स्तर पर पार्टी में युवाओं को तरजीह मिले। हमारी पार्टी में ऐसे कई प्रतिभाशाली युवा चेहरे हैं।"

उन्होंने कहा, "पार्टी के कई युवा कार्यकर्ता यह शिकायत करते हैं कि उन्हें प्रभावी तौर पर पार्टी में काम का मौका नहीं दिया जाता। यह दुख की बात है कि पार्टी में एक रेलगाड़ी के डिब्बे सी मानसिकता विकसित कर गई है। जिम्मेदार पदों पर बैठे नेता प्रतिभाशाली और कर्मठ युवा कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करते हैं और इन युवाओं को बाहर खड़े रह कर दरवाजा खुलने का इंतजार करना पड़ता है।"

आडवाणी ने कहा कि इस प्रवृत्ति को बदलना होगा। हमें ऐसे युवाओं की पहचान करनी होगी और उन्हें तैयार करना पड़ेगा। हमें भाजपा में तीसरी, चौथी और पांचवी पीढ़ी के नेता तैयार करने होंगे।

आडवाणी ने पार्टी नेताओं को सार्वजनिक रूप से पार्टी की आलोचना करने से बचने की हिदायत देते हुए पार्टी में अनुशासन की संस्कृति को बनाए रखने को कहा।

उन्होंने कहा, "हमारे कार्यकर्तायों को यह महसूस होना चाहिए कि पार्टी में एक ऐसा तंत्र भी है जहां वे अपने विचार रख सकते हैं, चाहे वह आलोचना ही क्यों न हो। "

उन्होंने कहा, "भाजपा में अनुशासन की संस्कृति है। इसका महत्वूपर्ण हिस्सा है कि सार्वजनिक रूप से विचारों को न प्रकट किया जाए। इसे उचित मंच पर उठाया जाए।"

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप में चुनावी हार की जवाबदेही तय करने की बात उठाई थी और कुछ नेताओं की आलोचना की थी।

आडवाणी ने कहा कि पार्टी को अब जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, उन राज्यों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में जल्द ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा को अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर इनमें से कम से कम दो राज्यों में जीत सुनिश्चित करनी चाहिए।"

उन्होंने नेताओं व कार्यकर्ताओं से आग्रह किया वे अभी से ही इन चुनावों की तैयारियों में जुट जाएं।

आडवाणी ने कहा, "आने वाले दिनों में भाजपा को अपनी स्थिति और मजबूत करनी चाहिए और साथ ही जहां हम अपने सहयोगी दलों के साथ खड़े हैं वहां उनके साथ आपसी समन्वय बढ़ाना चाहिए।"

आडवाणी ने इस बात पर चिंता जताई कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को उन क्षेत्रों में भी हार का सामना करना पड़ा जो कभी उसके गढ़ हुआ करते थे। उन्होंने कहा, "यह चिंता की बात है कि कुछ राज्य, जो हमारे गढ़ रहे हैं, वहां भी हमें हार का सामना करना पड़ा।"

उन्होंने कहा, "कुछ ऐसे बड़े राज्य हैं जहां हम बहुत अच्छी स्थिति में नहीं हैं और राज्य तो ऐसे हैं जहां हमारी उपस्थिति बिल्कुल भी नहीं है। इन कमियों को हमें पूरा करना होगा।"

आडवाणी ने कहा, "इसके अलावा हमें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए गंभीरता से काम करना पड़ेगा। अपने विचारों, अपनी योजनाओं और केंद्र व राज्यों में नेतृत्व की सीढ़ियां तैयार करने के लिए हमें एकजूटता दिखानी पड़ेगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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