धूमल ने हिमाचल के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की जलापूर्ति योजनाओं के लिए 172 करोड़ रुपये मांगे
मुख्यमंत्री ने जोशी को लिखे पत्र में कहा है कि हिमाचल प्रदेश विभिन्न केन्द्रीय एवं राज्य वित्त पोषित योजनाओं के अन्तर्गत अनेक योजनाओं को कार्यान्वित कर राज्य के प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को पर्याप्त स्वच्छ जल उपलब्ध करवाने के लिए प्रभावित कदम उठाए गए हैं तथा लोगों को वर्षा जल तथा अनुपयोगी जल के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में छोटी योजनाएं तैयार की गई हैं तथा अतिरिक्त जल स्रोतों के माध्यम से लोगों को जलापूर्ति सुनिश्चित बनाई जा रही है, लेकिन सूखा प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि गर्मियों के मौसम में अथवा सूखे की स्थिति में प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों में टैंकों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की गई है तथा इस स्थिति में सुधार केवल तभी संभव है जब इन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा होगी।
प्रो़ धूमल ने कहा कि कांगड़ा तथा बिलासपुर जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए तैयार की गई कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं का संवद्र्घन कर इनका प्राथमिकता के तौर पर कार्यान्वयन सुनिश्चित बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चंगर क्षेत्र में सभी योजनाओं के स्रोत स्तर का संवद्र्घन एवं पुनस्र्थापन जो देहरा, खुंडिया, जयसिंहपुर तथा पालमपुर तहसील के अधिकार क्षेत्र में पड़ता है, प्राथमिकता के तौर पर करने की आवश्कता है, जिसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर जिले के सदर, घुमारवीं तथा झण्डुता ब्लाकों के लिए कौल डैम से इसी प्रकार की विभिन्न स्रोत स्तर की संवद्र्घन जलापूर्ति योजनाएं कार्यान्वित करने की आवश्यकता है, जिसके लिए 64़66 करोड़ रुपये के वित्त पोषण की आवश्यकता होगी। इसी प्रकार कांगड़ा जिले के देहरा तहसील की जसवां तथा परागपुर के अन्तर्गत इसी प्रकार की अन्य योजनाएं कार्यान्वित करने की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों में आंशिक रूप से पेयजल प्राप्त बस्तियां तथा ऐसी बस्तियां जहां पर पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं है, के लिए 39़23 करोड़ रुपये के अनुमानित लागत की परियोजना के कार्यान्वयन की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि उपरोक्त तीनों प्रमुख योजनाओं के निष्पादन के लिए 172़22 करोड़ रुपये के केन्द्रीय वित्त पोषण की आवश्यकता होगी, जिसके लिए राज्य केन्द्रीय पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय से उदार वित्तीय सहायता की अपेक्षा करेगा। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से आग्रह किया कि वे इन परियोजनाओं को त्वरित स्वीकृति प्रदान करने में सहयोग करें ताकि प्रदेश सरकार द्वारा इन परियोजनाओं का निष्पादन किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी मंत्रालय द्वारा वित्त पोषण के आधार योजनाओं की बहुतायतता तथा प्रयासों के दोहरेपन से संसाधनों की समुचित उपयोगिता निश्चित तौर पर नहीं होगी। उन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ध्यान केन्द्रित करने का आग्रह किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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