यूरोप में भारतीय निवेश में गिरावट की संभावना : फिक्की
फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया है, "ईयू में वर्ष 2008 के दौरान जितना भारतीय निवेश (2.4 अरब यूरो) हुआ था, चालू वित्त वर्ष में उतना निवेश हो पाना कठिन है।"
सर्वे में शामिल किए गए लगभग 40 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा है कि वे ईयू में ताजा निवेश इस आधार पर करेंगे कि वह आर्थिक मंदी से कितनी जल्द उबर जाता है। उनका कहना है कि ईयू को विकास के पथ पर आने में छह से 12 महीने तक लग सकते हैं।
इस सर्वेक्षण में उन कंपनियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने अतीत में यूरोप में आटो, ऊर्जा, उत्पादन, रसायन व सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं (आईटीईएस) जैसे विभिन्न सेक्टरों में निवेश किया था।
यूरोपीय संघ के सांख्यकी कार्यालय, यूरोस्टेट के अनुसार वर्ष 2007 में भारतीय निवेशकों ने ईयू स्थित कंपनियों पर कब्जा जमाने के लिए 9.5 अरब यूरो (13 अरब डॉलर) का निवेश किया था। लेकिन आर्थिक मंदी के कारण वर्ष 2008 के दौरान निवेश का यह आंकड़ा गिर कर 2.4 अरब यूरो पर आ गया।
फिक्की का कहना है कि यह गिरावट इस वर्ष भी बनी रहेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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