'अभियान पूरा होने में वक़्त लगेगा'

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि लालगढ़ में सुरक्षा अभियान पूरा होने में कुछ वक़्त लग सकता है. इस बीच लालगढ़ के कुछ इलाक़ों से पुलिस और माओवादियों के बीच संघर्ष की ख़बरें मिली हैं.
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को संभलकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
चिंदबरम ने कहा कि इस उन्होंने बताया कि लालगढ़ में आगे बढ़ रहे सुरक्षाबल लाउडस्पीकरों और पर्चों की मदद से आम लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं.
इस बीच लालगढ़ इलाक़े में पुलिस कार्रवाई के दूसरे दिन सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच संघर्ष की ख़बरें मिल रही हैं.
शुक्रवार की सुबह राज्य पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों ने लालगढ़ से महज़ पाँच किलोमीटर दूर झिटका के जंगल में पहुँचकर कार्रवाई शुरू कर दी थी.
हिंसा की घटना पीराकट में हुई है जहाँ माओवादियों ने बारूदी सुरंग के ज़रिए पुलिस की एक गाड़ी को निशाना बनाया. इस हमले में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए.
लालगढ़ से आठ किलोमीटर दूर पीराकुली में शुक्रवार शाम माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई है.
नक्सलवाद स्वीकार्य नहीं
इस बीच दिल्ली में गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई स्थानीय आदिवासियों के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि क्षेत्र में मौजूद नक्सलवादी लड़ाकों से है.
उन्होंने कहा कि इस बात पर आश्चर्य होता है कि अभी तक राज्य की वाममोर्चे वाली सरकार ने माओवादियों के संगठन को चरमपंथी संगठन करार देते हुए प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया है.
पी चिदंबरम, केंद्रीय गृहमंत्री-भारत हम मानते हैं कि स्थानीय स्तर पर कुछ मुद्दे हो सकते हैं पर इसकी ओट में कोई हथियार उठाकर अलोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात नहीं रख सकता. मुद्दों को सामने लाने के लोकतांत्रिक तरीके हैं और उन्हें ही अपनाया जाना चाहिए
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साथ ही इस बात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि वाममोर्चे के कुछ नेता कथित तौर पर इस नक्सलवादी हिंसा को अंजाम देने वालों को कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस से जोड़कर देख रहे हैं.
उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि स्थानीय स्तर पर कुछ मुद्दे हो सकते हैं पर इसकी ओट में कोई हथियार उठाकर अलोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात नहीं रख सकता. मुद्दों को सामने लाने के लोकतांत्रिक तरीके हैं और उन्हें ही अपनाया जाना चाहिए."
राज्य सरकार ने कार्रवाई को और धारदार बनाने के लिए कोलकाता पुलिस के भी सौ जवानों को साथ भेजा है. पहले ही से कार्रवाई के लिए सीआरपीएफ़ और राज्य पुलिस के पाँच सौ जवान इलाक़े में हैं.
माओवादियों की बैठक
दूसरी ओर सुरक्षा बलों को लालगढ़ की ओर बढ़ने में मिल रही कामयाबी के बीच माओवादियों से जुड़े एक संगठन की बैठक हो रही है जिसमें नई रणनीति पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. माओवादियों के एक नेता संतोष पात्रो ने बैठक की पुष्टि की है.
जबकि सरकार ने कार्रवाई में तेज़ी लाने और आम नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वायु सेना के विमान का इस्तेमाल कर लालगढ़ इलाक़े में अपील पत्र गिराए हैं.
सरकार ने हज़ारों की संख्या में एक अनुरोध पत्र बाँटा है जिसमें कहा है, "सरकार की कार्रवाई आम लोगों के ख़िलाफ़ नहीं है और वो किसी भी तरह माओवादियों के बहकावे में नहीं आएँ, क्योंकि माओवादी उनका इस्तेमाल कर रहे हैं."
स्थानीय पत्रकार लक्ष्मण राय का कहना है कि सुरक्षाबलों के आगे बढ़ने से आम लोगों में तनाव और डर पैदा हो गया है और लोग इलाक़े को छोड़ कर भाग रहे हैं.
सुरक्षाबलों के आगे बढ़ने से आम लोगों में तनाव और डर पैदा हो गया है और लोग गाँव छोड़कर भाग रहे हैं
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार सुरक्षाकर्मियों को लालगढ़ की ओर बढ़ने में बहुत कम अवरोध का सामना करना पड़ रहा है.
अब कोई भी मानव दीवार नहीं है, क्योंकि माओवादियों ने मानव दीवार बनाने की रणनीति को बदल लिया है. पर जगह-जगह पर बारूदी सुरंगें बिछाई गईं हैं और पेड़ गिराकर अवरोध खड़े किए गए हैं.
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को पश्चिम मिदनापुर ज़िले के लालगढ़ इलाक़े में माओवादी विद्रोहियों ने सत्तारुढ़ सीपीएम के छह कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी थी और इलाक़े से सीपीएम के कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया था.
आदिवासी बाहुल्य लालगढ़ इलाक़े में विद्रोहियों और गाँववासियों ने अनेक गाँवों पर क़ब्ज़ा कर लिया है, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनेक कार्यालयों को आग लगा दी है.
लालगढ़ इलाक़े में लगभग आठ सौ से एक हज़ार गाँव हैं. उन इलाकों की आबादी लगभग 60 हज़ार है.


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