हंगामेदार हो सकती है भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी

लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्यों की बयानबाज़ी के कारण माना जा रहा है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हंगामेदार हो सकती है.
पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्यों ने चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद पार्टी के तौर-तरीक़ों पर सवाल उठाया है. वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने तो पार्टी के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया है.
सवाल उठाने वालों में जसवंत सिंह और अरुण शौरी भी शामिल हैं. जबकि पार्टी के अल्पसंख्यक नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी और सैयद शाहनवाज़ हुसैन पार्टी के एजेंडे को लेकर सवाल उठा चुके हैं.
एजेंडा
शुक्रवार शाम को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का एजेंडा तय करने की बैठक में भी खूब ड्रामा हुआ.
बैठक के दौरान वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने अरुण शौरी का पत्र बाँटने की कोशिश की, लेकिन उन्हें यह कहते हुए रोक दिया गया कि ये बैठक का एजेंडा नहीं है.
माना जा रहा है कि अरुण शौरी ने भी अपने पत्र में पार्टी की कार्यशाली पर सवाल उठाए हैं. लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के संसदीय दल में हुई नियुक्ति से भी कई नेता नाराज़ हैं.
लालकृष्ण आडवाणी को लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया है, जबकि सुषमा स्वराज को उपनेता. जबकि अरुण जेटली को राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाया है.
कुछ दिनों पहले सार्वजनिक रूप से कई नेताओं की बयानबाज़ी के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि पार्टी अपने अंदरुनी मामलों को सार्वजनिक नहीं करना चाहती और ऐसा करना अनुशासनहीनता माना जाएगा.
माना जा रहा है कि पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार पर चर्चा होगी. हालाँकि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा था कि इस पर चिंतन बैठक अगस्त में होगी.


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