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बिहार में चल रही है 'भोज राजनीति'

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भोज देने का सिलसिला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रारंभ किया। लोकसभा चुनाव में मिली जीत की खुशी में उन्होंने पिछले सप्ताह भोज का आयोजन किया था। इसके बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को अपने युवा नेता राहुल गांधी के जन्मदिन के मौके पर भोज का आयोजन किया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी पीछे नहीं रहा और एक दिन बाद यानी शनिवार को उसने भी कार्यकर्ता सम्मेलन के नाम पर भोज का आयोजन किया।

नेता इसे हालांकि 'भोज राजनीति' नहीं मानते। कोई इसे सामाजिक समरसता से जोड़ रहा है तो कोई इसे कार्यकर्ता सम्मेलन के लिए भोजन की व्यवस्था करने की बात कह रहा है।

राजद के महासचिव रामकृपाल यादव कहते हैं कि राजद का कार्यकर्ता सम्मेलन था तो बाहर से आने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था तो करनी ही थी। इसमें राजनीति जैसी कोई बात नहीं है। गौरतलब इसके पूर्व भी राजद द्वारा रैली तथा सम्मेलन का आयोजन किया गया था परंतु उसमें कार्यकर्ताओं के लिए भोजन का प्रबंध नहीं किया गया था।

इधर, राजद के भोज पर राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि यह राजद की हताशा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने तो चुनाव में जीत की खुशी में कार्यकर्ताओं के लिए भोज का आयोजन किया था तो क्या राजद ने अपने हार के गम में भोज का आयोजन किया है।

इधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा का कहना है कांग्रेस ने जनता दल (युनाइटेड) तथा राजद की तरह राजनीतिक हित साधने के लिए भोज का आयोजन नहीं किया था बल्कि समाज में सामाजिक समरसता कायम करने के लिए उसने यह आयोजन किया था। इसमें कांग्रेस के नेता, आम लोगों, सभी धर्मों के लोगों के साथ बैठ कर खाना खाया। ऐसे आयोजन से समाज में व्याप्त साम्प्रदायिक तनाव तथा जातिवाद समाप्त करने को बल मिलता है।

बहरहाल, राज्य की तीनों प्रमुख पार्टियों ने किसी न किसी बहाने भोज का आयोजन किया है अब देखने वाली बात होगी कि इस भोज से किसे कितना राजनीतिक फायदा मिलता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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