लालगढ़ः 60 हजार आबादी के बीच कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में संदिग्ध हथियारबंद माओवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के दूसरे दिन सुरक्षा बल के जवान लालगढ़ से महज़ पाँच किलोमीटर दूर रह गए हैं. शुक्रवार की सुबह राज्य पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों ने लालगढ़ से महज़ पाँच किलोमीटर दूर झिटका के जंगल में पहुँच कर कार्रवाई शुरू कर दी है.
सुरक्षा बल आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें कोई बड़ी बाधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है. सरकार ने कार्रवाई को और धारदार बनाने के लिए कोलकाता पुलिस के भी सौ जवानों को साथ भेजा है. पहले ही से कार्रवाई के लिए सीआरपीएफ़ और राज्य पुलिस के पाँच सौ जवान इलाक़े में हैं.
गुरुवार को सुरक्षा बलों को लालगढ़ से 16 किलोमीटर दूर रुकावट का सामना करना पड़ा था जहाँ लगभग तीन हज़ार लोगों की एक भीड़ मौजूद थी और उसने सुरक्षा बलों को आगे बढ़ने से रोका था, लेकिन शुक्रवार को स्थिति बदली हुई है.
माओवादियों की बैठक
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दूसरी ओर सुरक्षा बलों को लालगढ़ की ओर बढ़ने में मिल रही कामयाबी के बीच माओवादियों से जुड़े एक संगठन की बैठक हो रही है जिसमें नई रणनीति पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. माओवादियों के एक नेता संतोष पात्रो ने बैठक की पुष्टि की है.
जबकि सरकार ने कार्रवाई में तेज़ी लाने और आम नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वायु सेना के विमान का इस्तेमाल कर लालगढ़ इलाक़े में अपील पत्र गिराए हैं.
सरकार ने हज़ारों की संख्या में एक अनुरोध पत्र बाँटा है जिसमें कहा है, "सरकार की कार्रवाई आम लोगों के ख़िलाफ़ नहीं है और वो किसी भी तरह माओवादियों के बहकावे में नहीं आएँ, क्योंकि माओवादी उनका इस्तेमाल कर रहे हैं."
स्थानीय पत्रकार लक्ष्मण राय का कहना है कि सुरक्षाबलों के आगे बढ़ने से आम लोगों में तनाव और डर पैदा हो गया है और लोग इलाक़े को छोड़ कर भाग रहे हैं. स्थानीय पत्रकारों के अनुसार सुरक्षाकर्मियों को लालगढ़ की ओर बढ़ने में बहुत कम अवरोध का सामना करना पड़ रहा है.
अब कोई भी मानव दीवार नहीं है, क्योंकि माओवादियों ने मानव दीवार बनाने की रणनीति को बदल लिया है. पर जगह-जगह पर बारूदी सुरंगें बिछाई गईं हैं और पेड़ गिराकर अवरोध खड़े किए गए हैं.
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को पश्चिम मिदनापुर ज़िले के लालगढ़ इलाक़े में माओवादी विद्रोहियों ने सत्तारुढ़ सीपीएम के छह कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी थी और इलाक़े से सीपीएम के कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया था.
आदिवासी बाहुल्य लालगढ़ इलाक़े में विद्रोहियों और गाँववासियों ने अनेक गाँवों पर क़ब्ज़ा कर लिया है, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनेक कार्यालयों को आग लगा दी है. लालगढ़ इलाक़े में लगभग आठ सौ से एक हज़ार गाँव हैं. उन इलाकों की आबादी लगभग 60 हज़ार है.


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