लालगढ़ पहुंची सीआरपीएफ, मुठभेड़ शुरू

इलाके में हिंसा की वारदातें तेजी से जारी हैं। नक्सलियों ने सत्ताधारी मार्क्सजवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के चार और कार्यकर्ताओं को पश्चिम मिदनापुर जिले के गोलतोर के पास गोलियों से भून डाला। इन चारों को बुधवार को अगवा कर लिया गया था।
तीर-धनुष, कुल्हाड़ी, लाठियों से वार
सुरक्षा बल के जवानों के मालिदा में नक्सलियों द्वारा खड़ी की गई मानव ढाल के पास पहुंचने के थोड़ी ही देर बाद तीर-धनुष, कुल्हाड़ी और लाठी जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस सैकड़ों जनजातियों ने पेड़ों को काटकर रास्ते को अवरुद्ध कर दिया और 'इंकलाब जिंदाबाद" व 'माओवाद जिंदाबाद" के नारे लगाने लगे। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि वे रास्ते को खाली कर दें, लेकिन मानव ढाल के रूप में खड़े लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद सुरक्षा बलों ने पेड़ों को हटाना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने दो नक्सलियों को पास के खेत में दो राइफलों के साथ देखा। इसके बाद सुरक्षा बल के जवानों ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया और नक्सली वहां से भाग खड़े हुए।
जनजातीय लोगों से माफी मांगे सरकार
नक्सली नेता के कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी ने एक टीवी चैनल पर इन हत्याओं की जिम्मेदारी ली है। किशनजी ने मांग की है कि यदि सरकार लालगढ़ में व्याप्त अशांति का शांतिपूर्ण और मित्रवत समाधान चाहती है तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार को जनजातीय लोगों से माफी मांग लेनी चाहिए।


Click it and Unblock the Notifications