मध्य प्रदेश में भाजपा उलझी हार से उपजे सवालों में
प्रदेश सरकार से लेकर संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी तक प्रदेश की 29 में से 23 सीटें हासिल करने का दावा करते रहे थे। इन दावों ने राष्ट्रीय नेतृत्व को भी भ्रम में रखा मगर नतीजों ने दावों की पोल ही खोल दी। भाजपा चुनाव में सिर्फ 16 सीटें ही हासिल कर सकी है। पिछले एक माह से यह वजह तलाशने की कोशिश जारी है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।
भाजपा कार्यसमिति की दिल्ली में होने वाली दो दिवसीय बैठक में प्रदेश संगठन को इस बात का खुलासा करना है कि वे आखिर हारे क्यों है। प्रदेश संगठन से जुड़े पदाधिकारियों की बैठकों के कई दौर हो चुके है और इन बैठकों में कई ऐसे सवाल उठे है जिनसे पदाधिकारी चिन्तित भी है। प्रदेश प्रभारी सुषमा स्वराज तो यहां तक कह चुकी है कि उन्हें जो फीडबैक मिला, वह गलत निकाला। उन्हें लगता है कि चुनाव के दौरान समन्वय गड़बड़ रहा और फीडबैक देने में भी गंभीरता नहीं रही।
पार्टी में यह भी सवाल उठ रहा है कि मुख्य रूप से हार भी हमें वहीं मिली है जहां से दिग्गज चुनाव मैदान में थे और लगातार उनकी ओर से चुनाव के दौरान यही भरोसा मिलता रहा है कि जीत तो तय है। प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर हार के कारणों का ब्यौरा तैयार कर चुके है जिसे कार्यसमिति की बैठक में पेश किया जाना है। इस ब्यौरे से कई लोग मुसीबत में पड़ सकते है जिसकी चिन्ता सत्ता और संगठन से जुड़े लोगों को है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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