हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान साधक थे खान साहब (लीड-2)
खान के निजी सचिव आशीष राय ने बताया कि शुक्रवार को कैलीफोर्निया स्थित सैन एन्सेलमो में अपने आवास पर भारतीय समयानुसार सुबह 10.30 बजे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान साधक ने अंतिम सांस ली। उनके तीन पत्नियों से 11 बच्चे हैं। वह लंबे समय से गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे थे।
खान साहब का जन्म का 14 अप्रैल 1922 को कुमिल्लाह (बांग्लादेश) में हुआ था। वह प्रसिद्ध मैहर घराने के संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन खान के बेटे थे।
भारतीय शास्त्रीय संगीत में अतुलनीय योगदान के लिए खान साहब को पद्म विभूषण और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने कई बांग्ला फिल्मों में संगीत भी दिया था, जिसमें मशहूर फिल्म 'देवी' शामिल है।
खान साहेब ने सैन फ्रांसिस्को के समीप सैन रैफेल और स्विट्जरलैंड में अली अकबर खान कॉलेज की स्थापना की, जहां भारतीय संगीत और संस्कृति की शिक्षा दी जाती है। इसकी शाखा कोलकाता में भी है।
खान साहेब को विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों ने भी सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।
खान साहब के एक करीबी मित्र पंडित बिरजू महाराज ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा, "कलाकारों की मंडली में वह बड़े भाई की तरह थे। मैं उन्हें भैया कहा करता था, हमने कई बार एक साथ कार्यक्रम भी पेश किया है।"
महाराज ने कहा कि सरोद वादन के क्षेत्र में खान साहब का स्थान कोई नहीं ले सकता। उन्होंने कहा, "वह सरोद की दुनिया के सबसे बड़े कलाकार थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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