मध्य प्रदेश में जनजातियों को नहीं मिल रहा है उनका वाजिब हक : भूरिया
भूरिया ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने जनजातियों के लिए संचालित योजनाओं के लिए मंजूर राशि का सही इस्तेमाल न होने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी चर्चा की है और उनसे कहा है कि वह इन योजनाओं में गति लाने के लिए प्रशासन को दुरूस्त करें।
वन अधिकार कानून के संदर्भ में भूरिया ने कहा कि केन्द्र सरकार जनजातियों को भूमि का मालिक बनाना चाहती है मगर मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं हो पा रहा है। लगभग साढ़े तीन लाख परिवारों ने पट्टे के लिए आवेदन किया है मगर अधिकांश आवेदनों पर कोई फैसला नहीं हुआ है। इतना ही नहीं कर्ज माफी के मामले में भी प्रदेश में गति संतोषजनक नहीं है। इस संदर्भ में मध्य प्रदेश से केन्द्र सरकार को शिकायतें भी मिली हैं।
भूरिया का मानना है कि निचले स्तर पर प्रशासन को दुरूस्त करना जरूरी है जिससे केन्द्र की योजनाओं का सही तरह से क्रियान्वयन हो सके। प्रदेश सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह इस बात को खोजे कि कमजोर कड़ी कौन है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार जनजातीय क्षेत्रों की तकदीर और तस्वीर बदलने के लिए तत्पर है, इसीलिए राज्यों को अधिक से अधिक राशि दी जा रही है। केन्द्र की ओर से राज्य सरकारों के काम काज पर नजर रखी जाएगी।
एक सवाल के जवाब में भूरिया ने कहा कि प्रदेश की बैगा, भारिया और सहरिया जनजातियों के उत्थान के लिए उनके विभाग ने 25 करोड़ रुपए राज्य सरकार के लिए मंजूर किए हैं। इतना ही नहीं जनजातियों के परिवारों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश को 117 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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