सुरक्षा बलों ने किया लालगढ़ में प्रवेश (राउंडअप)

लालगढ़ (पश्चिम बंगाल), 18 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के अशांत लालगढ़ इलाके में सुरक्षा बलों ने गुरुवार को अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। मानव दीवार को तोड़ते हुए और नक्सलियों द्वारा की जा रही गोलीबारी का मुकाबला करते हुए सुरक्षा कर्मी लालगढ़ को विद्रोहियों से मुक्त कराने के लिए गुरुवार को आगे बढ़ गए।

इलाके में हिंसा की वारदातें तेजी से जारी हैं। नक्सलियों ने सत्ताधारी मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के चार और कार्यकर्ताओं को पश्चिम मिदनापुर जिले के गोलतोर के पास गोलियों से भून डाला।

इन चारों को बुधवार को अगवा कर लिया गया था और उनके शव गुरुवार को बरामद किए गए।

एक शीर्ष नक्सली नेता के.कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी ने एक निजी टीवी चैनल पर इन हत्याओं की जिम्मेदारी ली है।

बहरहाल, सुरक्षा बल के जवानों के मालिदा में नक्सलियों द्वारा खड़ी की गई मानव ढाल के पास पहुंचने के थोड़ी ही देर बाद तीर-धनुष, कुल्हाड़ी और लाठी जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस सैकड़ों जनजातियों ने पेड़ों को काट कर रास्ते को अवरुद्ध कर दिया और इंकलाब जिंदाबाद व माओवाद जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।

पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि वे रास्ते को खाली कर दें, लेकिन मानव ढाल के रूप में खड़े लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद सुरक्षा बलों ने पेड़ों को हटाना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने दो नक्सलियों को पास के खेत में दो राइफलों के साथ देखा। इसके बाद सुरक्षा बल के जवानों ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया और नक्सली वहां से भाग खड़े हुए।

पुलिस ने लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले दागना शुरू कर दिया और प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ दिया।

पुलिस ने अपना 'ऑपरेशन लालगढ़' शुरू करने के पहले कुछ घरों में तलाशी ली और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।

कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद दोइमा में सुरक्षा बलों पर सड़क के पास मिट्टी के बने मकानों से गोलीबारी की जाने लगी। इस कारण सुरक्षा बलों का कारवां कुछ समय के लिए वहीं रुक गया।

राज्य के पुलिस महानिरीक्षक राज कनोजिया ने कहा कि 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनमें से तीन पश्चिम मिदनापुर के हैं और 15 बांकुरा के।

उधर मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने कहा है कि उनकी सरकार जनजातियों की शिकायतों पर उनसे बातचीत करने को तैयार है। उन्होंने लालगढ़ के ग्रामीणों से अपील की कि वे नक्सलियों के बहकावे में न आएं।

राज्य के गृह सचिव अद्र्धेंदु सेन ने कहा कि बातचीत का दरवाजा खुला हुआ है। लेकिन पहले हिंसा को रोके जाने की जरूरत है।

सेन ने कहा कि बांकुरा और पुरुलिया जिलों में भी इसी तरह का अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम नक्सल प्रभावित तीन जिलों के सभी 18 पुलिस थानों को विद्रोहियों से मुक्त कराएंगे।"

इस बीच किशनजी ने मांग की है कि यदि सरकार लालगढ़ में व्याप्त अशांति का शांतिपूर्ण और मित्रवत समाधान चाहती है तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार को जनजातीय लोगों से माफी मांग लेनी चाहिए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के पोलित ब्यूरो के सदस्य किशनजी ने फोन पर कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने बड़ी मात्रा में सुरक्षा बलों को भेज कर एक मानसिक युद्ध छेड़ दिया है। यदि वे कार्रवाई शुरू करते हैं तो हम अपने साथ के लोगों की मदद से उसका मुकाबला करेंगे।"

उन्होंने कहा कि विद्रोही समूह ने सोमवार से पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड और बिहार में दो दिनों के बंद का अह्वान किया है।

उधर, झारखंड पुलिस को संदेह है कि लालगढ़ में अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई शुरु होने के बाद नक्सली राज्य में दाखिल हो सकते हैं।

पुलिस प्रवक्ता एस.एन. प्रधान ने आईएएनएस को बताया, "हमने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। हम पश्चिम बंगाल की पुलिस के संपर्क में हैं।"

पिछले सप्ताह नक्सलियों ने पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो और पलामू जिलों में 28 सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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