उड़ीसा में अपने ठिकानों का विस्तार कर रहे हैं नक्सली
नक्सलियों के खिलाफ जारी कार्रवाई में तैनात पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे असहाय हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है और साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से भी उन्हें समस्याओं से निपटने के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं मिलते हैं।
सूत्रों के अनुसार नक्सलियों ने राज्य में गत दो वर्षो में 100 से अधिक लोगों की हत्या की है, जबकि जवाबी कार्रवाई में 20 से भी कम नक्सली मारे गए। सोमवार को ही नक्सलियों ने संबलपुर जिले के जंगलों में राष्ट्रपति पदक विजेता एक सब-इंस्पेक्टर नरसिंह माखुद (54) की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पिछले हफ्ते मयूभंज और मलकानगिरी जिले में नक्सलियों ने तीन लोगों की हत्या की कर दी थी। राज्य की विपक्षी पार्टी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरती रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जुएल ओरांव ने आईएएनएस से कहा कि यदि राज्य सरकार को नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो उनके हमले तेज क्यों हो रहे हैं।
राज्य में लगभग 10 वर्षो में नक्सलियों की गतिविधियों में वृद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां पहले केवल तीन या चार राज्यों में नक्सली सक्रिय थे वहीं वर्ष 2007 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार वे 30 में से 15 राज्यों में सक्रिय हो चुके हैं। अब वे नयागढ़, कंधमाल और बौध जिले में भी पांव पसार चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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