'पाक से वार्ता में जल्दबाजी नहीं'

रूस के औद्योगिक शहर येकतरिनबर्ग में छह देशों वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक में हिस्सा लेने के बाद बुधवार को स्वदेश लौटते हुए अपने विशेष विमान में पत्रकारों से चर्चा में प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान से शांतिवार्ता शुरू करने में जल्दबाजी नहीं की जाएगी। दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक के नतीजों का वह इंतजार करेंगे।
भारत के प्रति दृढ़ता दिखाये पाक
उन्होंने कहा, "विदेश सचिवों की बैठक का उद्देश्य यह जानना है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले संगठनों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है या फिर क्या करने की उसकी योजना है।" प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने जरदारी से कहा कि भारत के खिलाफ आतंकवादी घटनाएं रोकने के लिए पाकिस्तान वैसी ही दृढ़ता दिखाए, जैसी उसने अलकायदा और तालिबान का मुकाबला करने में दिखाई है।
उन्होंने कहा, "जरदारी ने मुझे अपनी समस्याएं बताईं जिनका वह सामना कर रहे हैं। मैंने उन्हें बताया कि क्यों पाकिस्तान ने तालिबान और अलकायदा के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए। हम ऐसा महसूस करते हैं कि भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है।"
यह पूछे जाने पर कि अगले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच वार्ता का दौरा आरंभ हो जाएगा तो इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, "विदेश सचिवों की बैठक का नतीजा क्या रहेगा इसका मैं पूर्वानुमान नहीं लगा सकता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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