पाकिस्तान का बिना तैयारी के तालिबान के गढ़ पर हमला
नदीम सरवर
इस्लामाबाद, 17 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान में तालिबान के सरगना बैतुल्ला महसूद के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई से और ज्यादा खून-खराबे के अलावा और कुछ हासिल होने की संभावना नहीं है।
पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के गवर्नर ओवैस अहमद गनी ने सप्ताहांत में कहा कि सेना को महसूद के गढ़ अफगानिस्तान सीमा से लगे बीहड़ पहाड़ी जिले दक्षिणी वजीरिस्तान में "एक पूर्ण अभियान" का आदेश दिया गया है।
इस फैसले से अमेरिका संतुष्ट हो सकता है,जो महसूद के खिलाफ कार्रवाई के लिए लंबे समय से पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है। अल कायदा के महत्वपूर्ण सहयोगी महसूद पर अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का ईनाम रखा है।
बहरहाल स्थानीय विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम जल्दबाजी में उठाया गया है क्योंकि स्वात घाटी और तीन पड़ोसी जिलों में सेना अभी तक अपना अभियान समाप्त नहीं कर सकी है।
कबायली इलाके के पूर्व सुरक्षा प्रमुख महमूद शाह का कहना है, "हमले का समय अनुपयुक्त है। तालिबान के प्रमुख क्षेत्र में हमले के लिए जिस प्रकार की सैनिक तैयारी होनी चाहिए वह हमें दिखाई नहीं दे रही है।"
शाह ने कहा कि तालिबान के गढ़ में गंभीर हमले के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों और उपकरणों की आवश्यकता है लेकिन सेना का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भारत से लगी पूर्वी सीमा पर तैनात है। स्वात में भी सरकार का कब्जा बनाए रखने के लिए हजारों सैनिकों को तैनात रहना होगा।
महसूद के पास 10 से 15 हजार प्रशिक्षित, हथियारबंद और प्रेरित लड़ाके हैं। इसके अलावा उसके पास सैकड़ों आत्मघाती हमलावर भी मौजूद हैं। उसके संबंध अल कायदा और पंजाब में आधार रखने वाले लश्कर-ए-जेहादी तथा जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से भी है। इससे उसके पास हमलों के लिए अधिक पहुंच उपलब्ध है।
महसूद ने पाकिस्तानी सेना को वर्ष 2007 में पराजित किया था और एक विवादास्पद शांति समझौता करने के लिए बाध्य किया था। इसने उसे और ज्यादा खतरनाक बना दिया।
सीमा प्रांत के एक पत्रकार सलीम सफी ने कहा कि आत्मघाती हमलों के रूप में महसूद के पास जो जवाबी हमले की क्षमता मौजूद है वह स्वात के तालिबानी समूहों से अधिक घातक है और सरकार और देश को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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