निर्गुट व विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग जरूरी : खड़गे

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक जेनेवा में 15-17 जून के दौरान वैश्विक नौकरी संकट पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के अवसर पर निर्गुट देशों के श्रम मंत्रियों की बैठक में खड़ने ने कहा कि यह आपसी सहयोग संयुक्त राष्ट्र के विकसित देशों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने के साथ-साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है। उन्होंने ये बातें कहीं।

खड़गे ने कहा कि हालांकि यह वैश्विक वित्तीय संकट विकासशील देशों की वजह से नहीं आया है, लेकिन इसकी सबसे अधिक मार इन देशों पर ही पड़ी है। उनका निर्यात राजस्व घट गया है, रोजगार में कमी आ गयी है, पर्यटन में ह्रास हुआ है और प्रवास की दिशा पलट गयी है। कई सरकारों को वित्तीय पैकेज देने पड़े, जिससे उनका वित्तीय घाटा बढ़ा।

इससे सामाजिक क्षेत्र व्यय और रोजगार सृजन पर संसाधनों का टोटा खड़ा हो गया है। वैसे इस संकट के पहले भी निर्गुट और अन्य विकासशील देश संसाधन के संकट से जूझ रहे थे जो भूख, कुपोषण और खाद्य सुरक्षा से लड़ने की उनकी क्षमता को सीमित कर देता है। ईंधन और खाद्यान्न की कीमतों में बेतहाशा वृद्घि ने इन चुनौतियों को और भी गंभीर बना दिया है।

उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन विश्व में नौकरियों के संकट विषय पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है। यह संकट वैश्विक वित्तीय संकट का ही दुष्परिणाम है। लाखों लोगों की नौकरियां चली गयी हैं और मजबूत उद्यमों की भी हालात खराब है।

यह भी एक सच्चाई है कि आर्थिक क्षेत्र तथा रोजगार क्षेत्र के उबरने के बीच समय का फासला होगा। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन आईएलओ का इस फासले को कम करने में अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में आइएलओ के प्रस्तावित वैश्विक नौकरी समझौते से नौकरी का संकट के खत्म करने में मदद मिलेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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