पन्ना में बाघ कम हाने की वजह ढूंढ़ेंगे विशेषज्ञ
गौरतलब है कि वर्ष 2006 में पन्ना के राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की संख्या 34 हुआ करती थी लेकिन 2009 आते-आते एक भी बाघ न होने की खबरों ने वन्य प्राणी प्रेमियों से लेकर राज्य सरकार तक को चिंता में डाल दिया है। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कान्हा और बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से दो बाघिनें तो पन्ना ले जाई गई हैं मगर बाघ का कोई अता पता नहीं है। इसलिए अब पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बाघ ले जाने की चर्चाए जोरों पर हैं।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान का यह हाल क्यों हुआ है यह जानने के लिए राज्य सरकार ने एक विशेषज्ञों की समिति का गठन किया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) तथा मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक एच़ एस़ पावला ने बताया है कि गठित विशेषज्ञों की समिति बाघों की संख्या कम होने के जैविक अथवा प्रशासनिक कारणों का अध्ययन तो करेगी ही साथ में भविष्य में ऐसी स्थितियां निर्मित न हों इसके लिए सुझाव भी देगी। समिति ने बाघों की संख्या कम होने के विषय में आम लोगों से भी राय मांगी है। वन्य प्राणी प्रेमी अपना प्रतिवेदन समिति को 30 जून तक सौंप सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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