फोटोग्राफ़र ने क़साब की पहचान की

फोटोग्राफ़र ने क़साब की पहचान की

मुंबई मिरर अख़बार के फोटोग्राफ़र ने पिछले साल नवंबर में हुए मुंबई हमलों के सिलसिले में गिरफ़्तार आमिर अजमल क़साब को अदालत में पहचान लिया है.

मुंबई मिरर अख़बार के फोटोग्राफ़र ने पिछले साल नवंबर में हुए मुंबई हमलों के सिलसिले में गिरफ़्तार आमिर अजमल क़साब को अदालत में पहचान लिया है.

क़साब के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे के दौरान मुंबई मिरर अख़बार के फोटोग्राफ़र सेबेस्टियन डिसूज़ा ने कहा कि क़साब उन लोगों में शामिल था, जिसने मुंबई के भीड़ भरे रेलवे स्टेशन छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई थी.

इस हमले में 57 लोग मारे गए थे. डिसूजा ने क़साब की कई तस्वीरें ली थी.

मुंबई हमलों के दौरान गिरफ़्तार क़साब के ख़िलाफ़ 86 आरोप लगाए गए हैं, जिनमें भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने, हत्या और विस्फोटक रखने के मामले भी हैं.

इनकार

हालाँकि क़साब ने इन आरोपों से इनकार किया है. पुलिस का दावा है कि क़साब भी मुंबई में हुए हमलों में शामिल था. सोमवार को अदालती कार्यवाही के दौरान क़साब भी मौजूद था.

पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमलों में 170 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. इनमें नौ हमलावर भी थे.

अदालत में जब फोटोग्राफ़र सेबेस्टियन डिसूज़ा से क़साब के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं इसे कैसे भूल सकता हूँ. इसने मुझे मशहूर बना दिया."

डिसूज़ा ने अदालत को बताया कि क़साब और उसके एक साथी के हाथ में बंदूकें थी और दोनों ऐसे चल रहे थे, जैसे उन्हें कोई छू भी नहीं सकता.

26 नवंबर की रात मुंबई मिरर अख़बार के फोटोग्राफ़र सेबेस्टियन डिसूज़ा ताजमहल होटल की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से गोलियों की आवाज़ सुनी. उन्होंने अदालत को ये भी बताया कि कैसे उन्होंने अपने आप को गोलीबारी से बचाया.

उन्होंने अदालत से कहा, "शुरू में मैंने दो ऐसे लोगों को देखा, जिनके चेहरे स्पष्ट नज़र नहीं आ रहे थे. उन्होंने टिकट खिड़की पर गोलियाँ चलाई. लेकिन जब उन्होंने हमलोगों की ओर गोलियाँ चलानी शुरू की, तो ये स्पष्ट हो चुका था कि ये आतंकवादी हैं."

सेबेस्टियन डिसूज़ा ने एक दूकानदार और दो पुलिसवालों की तस्वीरें भी उतारी, जो इन हमलों में मारे गए. डिसूज़ा की खींची 19 तस्वीरों को अदालत में सबूत के रूप में पेश किया गया है. इनमें से तीन क़साब की है.

सराहना

इस साल वर्ल्ड प्रेस फोटो अवार्ड्स में सेबेस्टियन डिसूज़ा के काम को काफ़ी सराहना मिली थी.

शुरू में मैंने दो ऐसे लोगों को देखा, जिनके चेहरे स्पष्ट नज़र नहीं आ रहे थे. उन्होंने टिकट खिड़की पर गोलियाँ चलाई. लेकिन जब उन्होंने हमलोगों की ओर गोलियाँ चलानी शुरू की, तो ये स्पष्ट हो चुका था कि ये आतंकवादी हैं सेबेस्टियन डिसूज़ा

शुरू में मैंने दो ऐसे लोगों को देखा, जिनके चेहरे स्पष्ट नज़र नहीं आ रहे थे. उन्होंने टिकट खिड़की पर गोलियाँ चलाई. लेकिन जब उन्होंने हमलोगों की ओर गोलियाँ चलानी शुरू की, तो ये स्पष्ट हो चुका था कि ये आतंकवादी हैं

अदालत की कार्यवाही के दौरान अजमल आमिर क़साब सिर झुकाकर बैठे हुए थे. वो चुपचाप थे और चेहरे पर गंभीरता थी. डिसूज़ा की गवाही से पहले वो सिर झुकाकर रोने लगे.

जब जज एमएल तहलियानी ने क़साब से पूछा कि क्या वो रो रहे हैं, तो क़साब ने सिर हिलाकर हाँ में जवाब दिया.

जज तहलियानी ने कहा कि वे क़साब को अदालत से जाने की अनुमति नहीं दे सकते. अगर क़साब की तबीयत बहुत ख़राब है तो वे उन्हें जाने दे सकते हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या डिसूज़ा की तस्वीरों से क़साब विचलित हो गए हैं, विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कहा, "क़साब प्रशिक्षित आतंकवादी है. ये सब घड़ियाली आँसू है."

लेकिन क़साब के वकील अब्बास काज़मी ने कहा कि क़साब अच्छा नहीं महसूस कर रहे हैं और उन्हें चक्कर भी आ रहा है.

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