भागवत गीता अब प्राचीन जनजातीय भाषा में उपलब्ध

बांग्ला और नेपाली भाषा से मिलती जुलती 'राजबंशी भाषा' की लिपि भी बांग्ला से मिलती जुलती है। इसे कामतापुरी और ताजपुरी भाषा भी कहा जाता है।

पवन राजबंशी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "भागवद गीता का राजबंशी भाषा में रूपांतरण में मुझे चार महीने का वक्त लगा। इसके लिए मुझे भागवत गीता के संस्कृत, नेपाली और हिन्दी की मूल प्रति का अध्ययन करना पड़ा।"

उन्होंने कहा, "जब मैं छोटा था तब मेरे दादाजी गीता के श्लोक पढ़कर मुझे सुनाया करते थे। इस प्रकार मैं इस भाषा से परिचित हुआ।"

राजबंशी ने उम्मीद जताई कि राजबंशी गीता को उनके समुदाय के लोग पढ़ेंगे जिनकी भारत की सीमा से सटे मोरांग, सुंसारी और झापा में बहुलता है और जिनकी आबादी तीन लाख के करीब है।

उनकी तमन्ना है कि भारत के पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय सहित भूटान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में राजबंशी भाषा बोलने वाले भी उनके द्वारा रूपांतरित की गई गीता पढ़ें।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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