रूसी गर्मी में भारत-पाक रिश्तों पर जमीं बर्फ पिघलाने की कोशिश (राउंडअप)

येकतरिनबर्ग, 16 जून (आईएएनएस)। मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर जर्मी बर्फ को रूस के औद्योगिक शहर येकतरिनबर्ग की गर्मी में पिघलाने की कोशिश आरंभ हुई।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मुलाकात हुई और तय हुआ कि 15 जुलाई से पहले दोनों देशों के विदेश सचिव मिल बैठेंगे और सिर्फ आतंकवाद के मसले पर चर्चा करेंगे।

भारत और पाकिस्तान के बीच मंगलवार को हुई इस पहली उच्चस्तरीय वार्ता में मनमोहन सिंह ने आतंकवाद पर भारतीय चिंता से जरदारी को अवगत कराया। माना जा रहा है कि मनमोहन ने जरदारी से कहा है कि भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल न होने दे।

दोनों नेताओं के बीच मंगलवार को हुई 40 मिनट की वार्ता में यह फैसला हुआ कि 15 जुलाई से पहले दोनों के विदेश सचिव मिल बैठेंगे और सिर्फ आतंकवाद के मसले पर चर्चा करेंगे।

अधिकारियों के मुताबिक दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के विदेश सचिव आतंकवाद से जुड़े प्राथमिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे और जुलाई माह के मध्य में मिस्र के शहर शर्म-अल-शेख में होने वाले गुटनिरपेक्ष देशों (एनएएम) की बैठक से पहले इस संबंध में रिपोर्ट सौंपें।

संभावना है कि एनएएम देशों की बैठक के दौरान एक बार फिर मनमोहन और जरदारी की मुलाकात हो।

विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच फिर से वार्ता की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत करने के बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि आतंकवाद से जुड़े प्राथमिक मुद्दों पर विदेश सचिवों के बीच एनएएम की बैठक के पहले चर्चा होगी और फिर दोनों विदेश सचिव अपने-अपने नेताओं को बैठक के बारे में रिपोर्ट सौंपेंगे।"

येकतरिनबर्ग में आज संपन्न हुई छह देशों वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक के दौरान होटल हयात रिजेंसी के सिल्वर रूम में मनमोहन और जरदारी के बीच 40 मिनट की वार्ता हुई।

वार्ता की शुरुआत में मनमोहन ने जरदारी से कहा, "आपसे मिलकर खुशी हुई।" इसके बाद उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ आंतकवादी घटनाओं को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान को अपनी धरती का उपयोग नहीं करने देना चाहिए।

मनमोहन ने जरदारी से पाकिस्तान से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस व विश्वसनीय कार्रवाई करने और दोनों देशों के बीच ठप पड़ी द्विपक्षीय वार्ता को बहाल करने के लिए उचित माहौल तैयार करने को कहा।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मुंबई हमलों की साजिश रचने वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न किए जाने पर भी मनमोहन सिंह ने जरदारी को भारत की निराशा से अवगत कराया।

प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को यह संकेत भी दिए कि भारत उसके साथ सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की मंशा रखता है लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह तभी संभव है जब तक कि पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ ठोस व विश्वसनीय कदम नहीं उठाता। इसके बगैर बातचीत की प्रक्रिया का बहाल होना संभव नहीं है।

इससे पहले मनमोहन सिंह और जरदारी का आज दिन में आमना-सामना हुआ। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाए और फोटो भी खिंचवाए।

रूस के अलावा चीन, उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गीस्तान और कजाकिस्तान एससीओ के सदस्य हैं। एससीओ की यह पहली बैठक है जिसमें भारत भी शिरकत कर रहा है। भारत के साथ पाकिस्तान, ईरान और मंगोलिया को चार वर्ष पहले पर्यवेक्षक के तौर पर एससीओ में शामिल किया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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