मनमोहन का आतंकवाद के खात्मे और वित्तीय संस्थााओं में सुधार का आह्वान
येकतरिनबर्ग, 16 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने छह देशों वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शिखर बैठक को संबोधित करते हुए मंगलवार को आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
होटल हयात रिजेंसी के बॉल रूम में चल रही इस शिखर बैठक में मनमोहन ने इसमें शामिल नेताओं को कहा, "हमारे क्षेत्र में आतंकवाद की काली छाया, उग्रवादी विचारधारा और अवैध मादक पदार्थो का कारोबार बढ़ गया है। आज हो रही आतंकवादी घटनाओं का प्रकृति अंतर्राष्ट्रीय हो चुकी है।"
उन्होंने कहा, "आतंकवाद से कोई भी देश अछूता नहीं है। इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर हमें एक-दूसरे के सहयोग के लिए आगे आना होगा।"
क्षेत्रीय एकता और समृद्धि पर अपने विचार रखते हुए मनमोहन ने आर्थिक क्षेत्र में अधिक से अधिक सहयोग बढ़ाने और मौजूदा वित्तीय संकट की समस्या को सुलझाने के लिए एससीओ के देशों को आगे आने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, "हमारे पास जितने संसाधन उपलब्ध हैं उसके मद्देनजर हम मानते हैं कि एससीओ और भारत मिलकर अपने संयुक्त प्रयासों से इस क्षेत्र की आर्थिक समस्याओं का समाधान ढूंढ सकते हैं।"
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और संसाधनों के विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की जरूरतों पर भी बल दिया।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के सुधार पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की वर्तमान सच्चाइयों को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में भी अनुकूल सुधार आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान के आर्थिक पुनर्गठन के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में भारत के योगदान की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
रूस के अलावा चीन, उजबेकिस्तान, तजिकिस्तान, किर्गीस्तान और कजाकिस्तान एससीओ के सदस्य हैं। एससीओ की यह पहली बैठक है जिसमें भारत भी शिरकत कर रहा है। भारत के साथ पाकिस्तान, ईरान और मंगोलिया को चार वर्ष पहले पर्यवेक्षक के तौर पर एससीओ में शामिल किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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