इसराइली बयान से भड़के फलस्तीनी

इसराइली बयान ने फ़लस्तीनियों का आक्रोश भड़काया

फ़लस्तीनी अधिकारियों ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के उस बयान को सिरे से ख़ारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि फ़लस्तीनी राष्ट्र सेनारहित हो. प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक प्रमुख नीतिगत घोषणा करते हुए कहा था कि एक अलग फ़लस्तीनी राष्ट्र का गठन स्वीकार किया जा सकता है बशर्ते कि उसके साथ सेना न हो.

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के प्रवक्ता ने कहा कि नेतन्याहू की टिप्पणियों ने फ़लस्तीनी, अरब और अमरीकी रवैये को चुनौती दे डाली है. लेकिन अमरीका ने कहा कि बेन्यामिन नेतन्याहू का रुख़ आगे बढ़ने की दिशा में 'एक महत्वपूर्ण क़दम' है.

नेतन्याहू की टिप्पणियों ने सभी प्रयासों पर विराम लगा दिया है, सारी कोशिशें बेकार कर दी हैं और फ़लस्तीनी, अरब और अमरीकी रवैये को चुनौती दे डाली है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दो राष्ट्रों के सिद्धांत को सहमति दिए जाने के आह्वान के बाद इसराइली प्रधानमंत्री ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाषण में कहा कि फ़लस्तीनियों को इसराइल को एक यहूदी राष्ट्र के तौर पर मान्यता दे देनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी राष्ट्र में सेना न हो, उसका अपने वायुक्षेत्र पर नियंत्रण न हो और किसी तरह हथियारों की तस्करी न होने पाए.

फ़लस्तीनियों में ग़ुस्सा

उनके भाषण ने फ़लस्तीनी अधिकारियों में रोष पैदा कर दिया है. महमूद अब्बास के प्रवक्ता नबील अबू रज़ानिया ने कहा, "नेतन्याहू की टिप्पणियों ने सभी प्रयासों पर विराम लगा दिया है, सारी कोशिशें बेकार कर दी हैं और फ़लस्तीनी, अरब और अमरीकी रवैये को चुनौती दे डाली है".

बस्तियों का मामला शांति प्रक्रिया में एक बड़ी अड़चन है. फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब एराकात ने कहा कि भाषण ने किसी 'स्थाई समाधान के लिए बातचीत का दरवाज़ा बंद कर दिया है'.

उन्होंने कहा, "हम विश्व से कहना चाहते हैं कि वे उनके फ़लस्तीनी राष्ट्र के उल्लेख से धोखे में न आए क्योंकि उन्होंने उसकी कोई व्याख्या नहीं की है". एराकात ने कहा, "उन्होंने यरुशलम को इसराइल की राजधानी बताया है, कहा है कि शरणार्थियों की समस्या पर कोई बात नहीं होगी और बस्तियाँ वहीं रहेंगी".

"शांति प्रक्रिया वैसे ही कछुए की चाल चल रही है. आज रात नेतन्याहू ने उसे पीठ के बल लुढ़का दिया है".

'कड़ा विरोध हो'

गज़ा में हमास के प्रवक्ता समी अबू ज़ुहरी ने भाषण को 'नस्लवादी' क़रार दिया और अरब देशों से इसराइल का 'विरोध और मज़बूत' करने को कहा. लेकिन व्हाइट हाउस और फ़्रांसीसी विदेश मंत्री ने इसराइली नीति की रूपरेखा को आगे बढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम बताया.

शांति प्रक्रिया वैसे ही कछुए की चाल चल रही है. आज रात नेतन्याहू ने उसे पीठ के बल लुढ़का दिया है".

व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में कहा गया कि बराक ओबामा मानते हैं कि यह समाधान इसराइल की सुरक्षा और फ़लस्तीनियों की एक अलग राष्ट्र की जायज़ आकांक्षा सुनिश्चित करता है और वह इस लक्ष्य के प्रति प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं.

वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता सारा मॉरिस का कहना है कि नेतन्याहू की टिप्पणियों ने व्हाइट हाउस का उत्साह बढ़ाया है लेकिन यह पता नहीं चल पाया है कि इसराइली प्रधानमंत्री की यहूदी बस्तियों के मामले में टस से मस न होने की नीति के कारण इतना काफ़ी हो पाएगा.

वक्तव्य में नेतन्याहू का फ़लस्तीन में सेना ने होने के रुख़ का भी कोई ज़िक्र नहीं है. हमारी संवाददाता के अनुसार किसी भी भावी शांति समझौते में एक बड़ी अड़चन-बस्तियों के मामले का भी वक्तव्य में कोई उल्लेख नहीं है.

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