मानवाधिकार क़ानून का 'दुरुपयोग'

एक सर्वेक्षण के अनुसार बड़े पैमाने पर मानवाधिकार क़ानून का दुरुपयोग हो रहा है और इसका लाभ अपराधियों को ही मिल रहा है. वर्ष 1988 में इस क़ानून के अस्तित्व में आने के बाद क्या बदलाव आए हैं इसका जायज़ा लेने के लिए यह सर्वेक्षण किया गया था.
बीबीसी संवाददाता डैनी शॉ के मुताबिक हालाँकि इस बात के संकेत मिले हैं कि यह क़ानून बनने के बाद से लोगों के जीवन और सार्वजनिक सेवाओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.
लेकिन इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कुछ लोग मानवाधिकार क़ानून का ग़लत फ़ायदा उठा रहे हैं.
अपराधियों को लाभ
साथ ही 40 प्रतिशत लोगों का यह भी कहना था कि इसका असली फ़ायदा अपराधियों और चरमपंथियों को मिल रहा है. मानवाधिकार आयोग का कहना है कि इस क़ानून के बारे में जो ग़लत धारणाएँ हैं वे इसी तरह दूर हो सकती हैं कि उच्च पदों पर आसीन व्यक्ति एक मज़बूत और साहसी नेतृत्व प्रदान करें.
आयोग ने कहा कि सोच में बदलाव भी ज़रूरी है ताकि लोग समझें कि अन्य लोगों को सम्मान प्रदान करना भी उनके मानवाधिकार का ही एक हिस्सा है.


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