मैं भाजपा नहीं छोड़ूँगा: यशवंत सिन्हा

यशवंत सिन्हा ने पार्टी के उपाध्यक्ष पद सहित सभी पदों से ये कहकर त्याग-पत्र दे दिया था कि पार्टी चुनावों में हार की ज़िम्मेदारी पर मंथन कर उसकी ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रही है.
लेकिन रविवार को यशवंत सिन्हा ने बिहार में एक बयान में कहा कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे.
मैंने स्वीकार होने के लिए अपना इस्तीफ़ा भेजा था और मैं ख़ुश हूँ कि ये स्वीकार कर लिया गया है यशवंत सिन्हा
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पीटीआई के मुताबिक इस मुद्दे जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा,"मैंने स्वीकार होने के लिए अपना इस्तीफ़ा भेजा था और मैं 'ख़ुश' हूँ कि ये स्वीकार कर लिया गया है. इस मुद्दे पर मुझे और कोई टिप्पणी नहीं करनी है."
पूर्व विदेश और वित्त मंत्री ने हज़ारीबाग़ में अपने निवास स्थान पर कहा कि वो पार्टी में बने रहेंगे. उन्होंने कहा, "बेशक मैं पार्टी में हूँ और रहूँगा."
नाराज़गी
यशवंत सिन्हा संसदीय दल में हुई नियुक्तियों से नाराज़ थे. ये नियुक्तियाँ लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने की थी.
पार्टी शीर्ष नेतृत्व के अरूण जेटली को राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने के फ़ैसले से सिन्हा ख़ुश नहीं थे.
सिन्हा ने अपने पत्र में कहा, “भाजपा में विफलता के कारणों को छुपाने की कोशिश की जा रही है और इस सच्चाई को छिपाना एक मुश्किल काम है.”
जब सिन्हा से पूछा गया कि वे अपने हिस्से की कहानी के साथ कब सामने आएँगे तो उन्होंने कहा, "फ़िलहाल तो नहीं."
पिछले दिनों जसवंत सिंह के पत्र, यशवंत सिन्हा के बयान, सुधींद्र कुलकर्णी के लेख के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और निर्णयों को लेकर असंतोष की ख़बरें मीडिया में छपने लगी थीं.
इस पर पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिहं ने कहा था कि पार्टी के नेताओं के इस तरह के व्यवहार से पार्टी की छवि को नुक़सान पहुँचा है.


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