लापता परमाणु वैज्ञानिक का शव मिला

वे पिछले छह दिनों से ग़ायब थे. इससे मीडिया में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं.
पुलिस के मुताबिक़ परमाणु संयंत्र के वैज्ञानिक महालिंगम आठ जून की सुबह सैर के लिए गए थे और तभी से ग़ायब थे.
जाँच जारी
समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि महालिंगम नदीं में दुर्घटनावश गिरे या इसके पीछे कोई साज़िश है.
परमाणु वैज्ञानिक की तलाश में करवार नौसेना बेस के पाँच गोताखोर लगाए गए थे. इसके लिए नौसेना बेस से सहायता माँगी गई थी.
महालिंगम भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के कैगा संयंत्र के प्रशिक्षण विभाग में वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर कार्यरत थे.
स्थानीय गोताखोरों को जब अभियान में सफलता नहीं मिलती देख नौसेना के गोताखोरो को अभियान में लगाया गया आर गुप्त, पुलिस अधीक्षक करवार
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उनकी तलाश के लिए ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारियों ने सीआईएसएफ़ और स्थानीय पुलिस के साथ अपना अभियान तेज़ कर दिया था.
स्थानीय गोताखोरों ने कैगा कस्बे के पास से बहने वाली काली नदीं में 35-40 किमी तक महालिंगम की तलाश की.
तलाशी अभियान
करवार के पुलिस अधीक्षक आर गुप्त ने बताया कि स्थानीय गोताखोरों को जब अभियान में सफलता नहीं मिली तो नौसेना के गोताखोरों को अभियान में लगाया गया.
काली नदी से महालिंगम का शव मिलने से पहले उनकी तलाश कैगा के जंगलों में भी की गई. इस काम में स्थानीय पुलिस, सीआईएसएफ़ और वन विभाग के जवानों को लगाया गया था.
पुलिस ने बताया कि परमाणु संयंत्र के अधिकारियों और महालिंगम के परिजनों ने उनके शव की पहचान की.
परमाणु संयंत्र के वैज्ञानिक के ग़ायब हो जाने से मीडिया में कई तरह की आशंकाएँ जताई जा रही थीं लेकिन एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने यह साफ़ कर दिया था कि महालिंगम एक ट्रेनिंग केंद्र में कार्यरत थे और उनके पास कोई संवेदनशील कागज़ात नहीं थे.
महालिंगम ने इसके पहले चेन्नई के पास स्थित कलपक्कम के मद्रास परमाणु ऊर्जा परियोजना (एमएपीपी) में तैनात थे.
अधिकारियों के मुताबिक़ महालिंगम एमएपीपी में काम करते हुए भी एक बार कुछ दिनों के लिए ग़ायब हो गए थे लेकिन कुछ दिन बाद ही वे घर लौट आए थे.


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