परमाणु वैज्ञानिक का शव बरामद

महालिंगम 8 जून से लापता थे। महालिंगम की तलाश के लिए गुरुवार को विशेष खोजी दल गठित किया गया था। कैगा 1000 एकड़ में फैले मल्लापुर जंगल से घिरा है और इसी जगह पुलिस अपना खोजी अभियान चला रही थी। पुलिस को पहले से ही आशंका थी कि महालिंगम नदी में डूब गए है। नौसेना के गोताखोरों ने टाउनशिप स्थित कैगा आरामगृह के पीछे बह रही नदी में वैज्ञानिक के शव का पता लगाया। पांच सदस्यों की नेवी की टीम ने लगातार काली नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया। आखिरकार महालिंगम का शव मिला।
मौत का रहस्य अनसुलझा
महालिंगम के परिवार वालों ने शव की पहचान कर ली है। उधर, न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन आफ इंडिया लि. (एनपीसीआईएल) के मुताबिक महालिंगम किसी संवेदनशील प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर रहे थे। गोपनीय दस्तावेजों तक उनकी पहुंच भी नहीं थी। कैगा से पहले महालिंगम कलपक्कम में मद्रास एटोमिक पावर प्रोजेक्ट एमएपीपी) से जुड़े थे।
47 वर्षीय महालिंगम सोमवार सुबह टहलने के लिए निकले थे लेकिन वह वापस घर नहीं लौटे। उसी दिन शाम में उनकी पत्नी विनयाकर सुंदरी ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। एमएपीपी में काम करते हुए भी वे एक बार लापता हो गए थे हालांकि कुछ दिन बाद वे स्वयं ही घर लौट आए थे। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सकता है कि उनकी मौत कैसे हुई है।
कैगा परमाणु संयंत्र
यह संयंत्र देश के सबसे बड़े सेना के बेस- 'प्रोजेक्ट सी बर्ड' के पास है। इस संयंत्र में मार्च 2000 से काम चल रहा है। न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन आफ इंडिया इसका संचालन करती है। इसकी चार इकाइयां हैं, जिनमें से एक अभी भी निर्माणाधीन है। कैगा प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेश्रान ऑफ इंडिया द्वारा चलाया जा रहा है। कैगा परमाणु सयंत्र परमाणु ऊर्जा के सिविल उपयोग के लिए डिजाइन और निर्माण का काम करता है और यह पावर प्लांट है। यहां पर सामरिक परमाणु कार्यक्रम नहीं चलाया जाता।


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