सैनिक सीख रहे हैं योग

सागर के महार रेजीमेंट के लगभग 1600 अधिकारी और विभिन्न ओहदों के जवान इन दिनों योग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। सैनिकों को यह प्रशिक्षण मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने और विषम परिस्थितियों से मुकाबला करने के साथ उनकी क्षमता में इजाफा करने के मकसद से दिया जा रहा है।

ब्रिगेडियर डी़ आऱ सिंह का कहना है कि सैनिक जटिल परिस्थितियों के अलावा विपरीत वातावरण में काम करते हैं। इसके दुष्परिणाम उनके स्वास्थ्य और शरीर पर पड़ते हैं। इतना कुछ होने के बावजूद उनकी मानसिक एकाग्रता बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि वह योग को अपनाए।

महार रेजीमेंट के जवानों को योग प्रशिक्षण देने वाले योगाचार्य डॉ़ विष्णु आर्य का कहना है कि शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग आवश्यक है। सैनिकों के लिए तो योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनका मानना है कि सैनिक लंबे अरसे तक हथियारों के साथ रहते हैं और उन्हें उन ताकतों से मुकाबला करना पड़ता है जो समाज विरोधी होते हैं। इतना ही नहीं वे अपने घर परिवारों से भी लंबे अरसे तक दूर रहते हैं। इसलिए जरूरी हो जाता है कि उनमें भावनाओं का प्रभाव बरकरार रहे। इसमें योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

योगाचार्य ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि विषम परिस्थितियों के बीच लंबे अरसे तक रहने से क्रोध बढ़ता है। सैनिक को क्रोध आना घातक हो सकता है, क्योंकि उसके पास हथियार भी होता है। यह क्रोध नियंत्रित रहे और मानसिक एकाग्रता बनी रहे इसके लिए जरूरी है कि सैनिक योग करें।

आम आदमी और सैनिकों को दिए जाने वाले योग प्रशिक्षण में अंतर होने की बात डॉ़ आर्य स्वीकारते हैं। उनका कहना है कि आम आदमी शारीरिक तौर पर कुछ कमजोर होता है जबकि सैनिक का शरीर स्वस्थ तथा मजबूत होता है। इसलिए दोनों को योग प्रशिक्षण देने की विधियां अलग-अलग हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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