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'कैलाश पर्वत यात्रा तब स्वर्ग था, अब नर्क बन गया'

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सुदेशना सरकार

काठमांडू, 14 जून (आईएएनएस)। एक सरकारी उद्यम के साथ बतौर अधिकारी जुड़ी रहीं अरुणा प्रताप सिंह राठौर का कहना है कि जब 1997 में वह कैलाश पर्वत की यात्रा पर गई थीं तो उस यात्रा के दौरान की व्यवस्था और रखरखाव से वह काफी प्रभावित हुई थीं। उस बार की यात्रा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित की गई थी।

अब 12 साल बाद गुजरात राज्य वित्त निगम के उपनिदेशक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद जब वह दोबारा कैलाश पर्वत की यात्रा पर गईं तो उन्होंने नारकीय अनुभव किया। इस बार की यात्रा एक निजी टूर संचालक ने आयोजित की थी।

हालांकि 53 वर्षीय यह महिला अपनी 23 वर्षीय भतीजे के साथ तिब्बत में स्थित पवित्र कैलाश पर्वत की सफलतापूर्वक परिक्रमा करने में सफल रही। लेकिन वह कहती हैं कि वह टूर संचालक की दुर्व्यवस्था और निष्ठुरता से भयभीत थीं।

राठौर ने आईएएनएस से कहा, "मंत्रालय सख्त स्वास्थ्य परीक्षण पर जोर देता है। लाटरी के जरिए श्रद्धालुओं का चयन हो जाने के बाद मंत्रालय की ओर से स्वास्थ्य जांच की एक सूची सौंपी जाती है। जांच के बाद ही वे किसी व्यक्ति को यात्रा पर जाने के लिए प्रमाणित करते हैं।"

लेकिन निजी टूर संचालक मात्र अपने लाभ के चक्कर में रहते हैं। उन्हें यात्री के स्वास्थ्य से कोई खास लेना-देना नहीं होता।

राठौर ने कहा, "नेपाल की सीमा पार कर तिब्बत में पहुंचने के बाद हम रात को एक स्थान पर रुके। वहां बाहर काफी होहल्ला मचा हुआ था। हमने पाया कि एक 83 वर्षीय अकेली बूढ़ी महिला, जिसे इसी टूर संचालक ने अपने साथ लाया था, रात को उस लॉज के बाहर बर्फीले वातावरण में छूट गई थी।"

सरला देवी नामक चेन्नई की इस महिला के साथ उसका सामान भी नहीं था।

राठौर के समूह में शामिल नई दिल्ली की एक घरेलू महिला सीमा ठाकुर ने आईएएनएस को बताया, "उसका सामान टूर संचालक द्वारा कहीं हटा दिया गया था। उसमें उसकी दवा रखी हुई थी। वह रोते हुए अपना बैग ढूढ़ रही थी, लेकिन उसे बैग नहीं मिल पा रहा था।"

सीमा ठाकुर ने कहा, "हमें इस पर आश्चर्य हुआ कि जो महिला दो कदम चल नहीं सकती, उसे टूर संचालक ने इस यात्रा के लिए कैसे अनुमति दे दी।"

राठौर के समूह ने हालांकि सरला देवी को अपने पहले से तंग कमरे में ही जगह दे दी। लेकिन वह कैलाश पर्वत की यात्रा पूरी नहीं कर पाई। वह महिला खुद को पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के परिवार का बताती थी। थकान और अन्य दिक्कतों के कारण उसकी मौत हो गई। उसके शव को वापस काठमांडू लाया गया।

राठौर ने आईएएनएस को बताया, "विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित यात्रा में आपके साथ तीन लोग होते हैं। एक सप्ताह में केवल एक समूह ही जाता है। यात्रियों के साथ सरकारी अधिकारी होते हैं। वे नई दिल्ली से बराबर संपर्क में रहते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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