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प्रेमियों को नहीं होगी फांसीः सु्प्रीम कोर्ट

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Supreme Court of India
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है प्रेमांधता में आकर हत्या करने वालों को फांसी की सज़ा नहीं हो सकती। अदालत के अनुसार प्रेम में पड़ कर किए गए अपराध की गंभीरता कम हो जाती है इसलिए ऐसे मुजरिम के फांसी की सज़ा नहीं सुनाई जा सकती।

सु्प्रीम कोर्ट ने यह फैसला पंजाब सरकार की उस याचिका को खारिज करते हुए सुनाया, जिसमें उसने दो हत्यारोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। दोनों ने अपनी सामूहिक प्रेमिका के साथ सांठगांठ कर उसके पति और बेटे सहित दो अन्य की वर्ष 1994 के में हत्या कर दी थी।

अदालत ने अपने एक आदेश में कहा कि दोनों को फांसी पर लटकाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि उन्होंने अपनी प्रेमिका के उकसावे में आकर प्रेमांधता वश हत्याओं को अंजाम दिया। इस कारण अपराध की गंभीरता कम हो जाती है।

न्यायमूर्ति मुकुंदकम शर्मा और न्यायमूर्ति बी.एस.चौहान की खंडपीठ ने कहा, "इस सच्चाई में कोई संदेह नहीं कि दोनों व्यक्तियों ने क्रूरतापूर्वक चार व्यक्तियों की हत्या उस समय कर दी जब वे सो रहे थे। लेकिन इस मामले की गंभीरता को कम करने वाली स्थितियां मौजूद हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए हमारे विचार से इसके लिए आजीवन कारावास की सजा पर्याप्त है।"

दरअसल, सरहिंद कस्बे के नगरायुक्त सेवा सिंह और उनके बेटे रछपाल सिंह उर्फ हैपी और स्थानीय गुरुद्वारे के दो सेवादारों इंदरजीत सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और दोनों अभियुक्तों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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