अब न 'राजा साहब' न 'रानी साहिबा'

राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने एक आदेश जारी कर मीडिया को सलाह दी है कि वह पहले के राजा-रानियों के लिए शाही संबोधनों के इस्तेमाल से बचे. इस परिपत्र ने मीडिया को याद दिलाया गया है की देसी रियासतों के शासकों को दी गई मान्यता बहुत पहले ही ख़त्म हो चुकी है.सरकार ने मीडिया से अपील की है कि वे इन संबोधनों से बचें जिससे भ्रामक हालात न पैदा होने पाएँ.
मान्यता नहीं
इस परिपत्र में कहा गया है कि भारत ने अपने सविंधान में संशोधन कर देसी राज्य के हुक्मरानों को दी गई मान्यता ख़त्म कर दी थी. सरकार ने कहा है कि भारत के गणराज्य बनने और राज्य के एकीकरण के बाद अब कोई भी व्यक्ति महाराजा नहीं रहा और न ही कोई ऐसा भौगोलिक क्षेत्र है जिसे रियासत के नाम से पुकारा जा सके.
यह विडंबना ही है की पहले के जिन राजा-महाराजाओं को हासिए पर आ जाना था, उन्होंने न केवल अपने पुराने पदनामों को बखान करना शुरू कर दिया बल्कि इन पदनामों का खुलेआम विज्ञापन भी करने लगे हैं डॉक्टर राजीव गुप्त, राजनीतिक विश्लेषक
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इस परिपत्र में याद दिलाया गया है कि पत्रकारों की अचार संहिता में भी ज़िक्र है की प्रेस को आधारहीन और भ्रामक तथ्यों के प्रकाशन से बचना चाहिए. राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर राजीव गुप्त कहते हैं कि हाल के वर्षों में सामंती संबोधनों का इस्तेमाल बढ़ा है.
डॉक्टर गुप्त कहते हैं, "पहले शाही और सामंती प्रतीकों का प्रचालन प्रोत्साहित कराया गया और फिर उन राजशाही पदनामों का धड़ल्ले से प्रयोग किया जाने लगा, जो सविंधान संसोधन के जरिए अपनी क़ानूनी हैसियत खो चुके थे."
वह कहते हैं, "यह विडंबना ही है की पहले के जिन राजा-महाराजाओं को हासिए पर आ जाना था, उन्होंने न केवल अपने पुराने पदनामों को बखान करना शुरू कर दिया बल्कि इन पदनामों का खुलेआम विज्ञापन भी करने लगे हैं." भाजपा विधायक सूर्यकांत व्यास ने राज्य की भाजपा सरकार के कार्यकाल में कहा था की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को महारानी कहकर संबोधित करने में कोई बुराई नहीं है.
मीडिया ज़िम्मेदार
जाने माने नाटककार रणवीर सिंह दूंद्लोद कहते हैं कि केवल मीडिया ही इन चीजों को बढ़ावा देता है. शाही घरानों की शस्त्र पूजा जैसे आयोजनों के बढ़ते कवरेज के सवाल पर वह कहते हैं कि यह केवल मीडिया ही कर रहा है. शस्त्र पूजा घरेलू आयोजन है, मगर मीडिया ही इसे ज़्यादा कवरेज देता है. दूंद्लोद ख़ुद भी ऐसी ही पृष्ठभूमि से आते हैं लेकिन वह कहते हैं तलवार से अधिक ताक़तवर कलम है.लोकसभा चुनाव में इन पुराने राजे-राजवाड़ों के चार लोग सांसद बने हैं. इनमे से तीन कांग्रेस के हैं जबकि एक भाजपा का.


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